धनबाद मेयर चुनाव: माफिया से मजदूर, लखपति से करोड़पति तक आगे-पीछे चल कैसे मांग रहे समर्थन


धनबाद(DHANBAD) : धनबाद नगर निगम का चुनाव धनबाद से लेकर रांची तक प्रतिष्ठा का सवाल पैदा कर दिया है. भाजपा के लिए भी महत्वपूर्ण है तो झामुमो के लिए भी कम महत्वपूर्ण नहीं है. यह अलग बात है कि धनबाद में माफिया से लेकर मजदूर तक, लखपति से लेकर करोड़पति तक, उच्च शिक्षाधारी से लेकर कम पढ़े लिखे भी उसी रास्ते पर वोट मांग रहे हैं, जिस रास्ते पर कभी वह पैदल चले नहीं होंगे। उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने की वजह से वोटर भी परेशान हैं. कुछ वार्डों में तो वार्ड पार्षदों के उम्मीदवारों की संख्या भी दो दर्जन से अधिक है. नतीजा है कि मतदाताओं के दरवाजे पर एक उम्मीदवार जाता है, तो दूसरा पहुंच जाता है.
सबके अपने-अपने दावे हैं, 23 फरवरी को मतदान होगा और 27 फरवरी को मतगणना होगी। इस बार मेयर की कुर्सी इसलिए भी "म्यूजिकल" हो गई है कि कम से कम दो उम्मीदवार ऐसे मैदान में हैं. जो धनबाद के मेयर रह चुके हैं. श्रीमती इंदु देवी पहली मेयर थी तो शेखर अग्रवाल दूसरे मेयर रहे. दोनों इस बार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह भी मजबूती से मैदान में खड़े हैं, तो कांग्रेस से शमशेर आलम चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने संजीव अग्रवाल को समर्थन दिया है. केके पॉलिटेक्निक के संस्थापक रवि चौधरी भी मैदान में हैं. इस बार चुनाव इसलिए भी रोचक हो गया है कि कई "हैवीवेट" उम्मीदवार मैदान में उतर गए हैं. आज 15 तारीख है, चुनाव में अब अधिक वक्त नहीं है.
इतना तो कहा ही जा सकता है कि इस बार का चुनाव प्रचार थोड़ा बदला -बदला सा दिख रहा है. लगभग सभी उम्मीदवार प्रचार में ताकत झोंक दिए हैं. जिन उम्मीदवारों को पार्टियों का समर्थन है, उनके प्रचार में बड़े नेता भी पहुंचने वाले हैं. वैसे ,इलाके के सांसद और विधायकों के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है. क्योंकि सूत्र बता रहे हैं कि ऊपर से निर्देश है कि उम्मीदवार के पक्ष में मजबूती से काम करें। अगर शिकायत मिलेगी ,तो आगे कार्रवाई हो सकती है. भाजपा ने इस बार संजीव कुमार को अपना समर्थन दिया है तो झामुमो की ओर से शेखर अग्रवाल मैदान में है. कांग्रेस ने शमशेर आलम को सपोर्ट किया है. वार्ड पार्षद से लेकर मेयर प्रत्याशियों तक की प्रचार गाड़ियां घूम रही है. घर -घर प्रचार भी हथियार बना हुआ है.
बता दें कि धनबाद निगम चुनाव में धनबाद, झरिया, सिंदरी और बाघमारा विधानसभा के क्षेत्र आते हैं. मतलब धनबाद, झरिया और बाघमारा तीनों सीट अभी भाजपा के पास है. ऐसे में भाजपा के विधायकों की भी बड़ी जिम्मेवारी है कि वह पार्टी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में कोई "करिश्मा" करें। धनबाद के सांसद भी भाजपा के ही हैं, वह भी जिम्मेवारी से बच नहीं सकते हैं. सभी उम्मीदवार गुणा- गणित बैठा रहे है. यह अलग बात है कि इस बार निकाय चुनाव में झामुमो मजबूती से मैदान में है. इसके पहले के चुनाव में वह इतना अधिक दिलचस्पी नहीं ले रहा था. लेकिन इस बार पार्टी के इंटरेस्ट बढ़ा है. देखना दिलचस्प होगा कि आखिर ऊंट किस करवट बैठता है?
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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