धनबाद लोकसभा : प्रचार में स्थानीय मुद्दे हावी, लोकल गारंटियों के भरोसे ताल ठोंक रहे उम्मीदवार 

    धनबाद लोकसभा : प्रचार में स्थानीय मुद्दे हावी, लोकल गारंटियों के भरोसे ताल ठोंक रहे उम्मीदवार 

    धनबाद(DHANBAD):  2024 के  लोकसभा चुनाव में गारंटी की खूब चर्चा है.  मोदी की गारंटी, कांग्रेस की न्याय गारंटी तो अब अरविंद केजरीवाल की गारंटी भी सामने आ गई है.  यह अलग बात है कि यह गारंटी  राज्य और लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से बदल रही है. यहाँ तक विधानसभा में भी बदलनी पड़ रही है.  जो जहां जा रहा है, उस जगह के हिसाब से गारंटी दे रहा है.  यह बात भी सच है कि स्थानीय मुद्दे भी कहीं-कहीं चुनाव पर हावी दिख रहे है.  धनबाद में भी प्रत्याशी गारंटी की डोर पकड़कर  ही चुनाव लड़ रहे है.   स्थानीय मुद्दों पर गारंटी  का जोर अधिक है.  कोई लॉ एंड ऑर्डर की बात कर रहा है तो कोई विस्थापन की बात कर रहा है.  कोई यह कह रहा है कि अगर आपका भाई और बेटा जीत गया तो दिन हो या रात, वह आपके एक फोन कॉल पर आपके बीच होगा.  तो कोई कह रहा है कि धनबाद लोकसभा क्षेत्र की बेटी हूं, बेटी बनकर ही रहूंगी.  

    आपका बेटा -आपकी बेटी के इर्द गिर्द प्रचार 

    आपकी सेवा करूंगी, आपको अपनी समस्याओं से दो-चार नहीं होना होगा.  आपकी समस्याओं की पोटली मैं  खुद संभालूंगी, मतलब धनबाद का चुनाव भी स्थानीय गारंटी पर ही लड़ा जा रहा है.  यह अलग बात है कि धनबाद  अपने हक और हुकूक  के लिए लड़ाई लड़ता रहा है.  धनबाद जिसके लिए जाना जाता है, वह यहां से धीरे-धीरे खत्म हो रहा है.  समस्याएं बहुत है.  वोटरों से बात करने परकहते है   कि वह लोग मुद्दे पर वोट करेंगे.  प्रत्याशी पर विचार करने के बाद वोट करेंगे.  यह  अलग बात है कि धनबाद लोकसभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है और यही वजह है कि 2004 को छोड़ दिया जाए तो 1991 से लगातार यहां भाजपा जीतती रही है.  कांग्रेस हमेशा पैराशूट उम्मीदवारों पर भरोसा करती रही.  इस बार भाजपा बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो को उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस बेरमो  के विधायक अनूप सिंह की पत्नी अनुपमा सिंह को उम्मीदवारी सौंपी  है.  

    चुनाव प्रचार मर दिखने लगी है तेजी 

    चुनाव प्रचार तो चल रहा है.   व्यक्तिगत हमले भी शुरू हो गए है.  जातीय संगठनों को जोड़ने की कोशिश शुरू हो गई है, लेकिन जातीय संगठनों के वोट किसके पक्ष में शिफ्ट होंगे यह  अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है.  धनबाद लोकसभा में कुल  6 विधानसभा क्षेत्र है.  सभी विधानसभा क्षेत्र की अपनी अपनी समस्याएं है.  कोई भी विधानसभा क्षेत्र समस्याओं से मुक्त नहीं है.  निरसा विधानसभा क्षेत्र की अपनी समस्या है तो  धनबाद विधानसभा में कोई दूसरी समस्या है.  इसी प्रकार झरिया विधानसभा अपनी समस्याओं से जूझ रहा है तो सिंदरी में भी समस्याएं कम  नहीं है. बोकारो में भी परेशानी है तो चंदनकियारी  भी संतुष्ट नहीं है.  यही वजह है कि धनबाद लोकसभा के प्रत्याशियों को जगह-जगह गारंटी बदलनी  पड़ रही है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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