धनबाद जिला झामुमो : पढ़िए कैसे चरितार्थ हुई  "चले थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास" वाली कहावत 

    धनबाद जिला झामुमो : पढ़िए कैसे चरितार्थ हुई  "चले थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास" वाली कहावत 

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद जिला झारखंड मुक्ति मोर्चा में एक नया बखेड़ा शुरू हो गया है. जिला समिति पर "चले थे हरिभजन को,ओटन लगे कपास" वाली कहावत चरितार्थ हो गई है. जिला समिति लोकल नेताओं को कठघरे में खड़ी करने गई थी, लेकिन अब खुद कार्रवाई की जद में आ गई है. लोकसभा चुनाव खत्म होते ही धनबाद में विवाद तेज हुआ है. यह अलग बात है कि 2 महीने के बाद विधानसभा का चुनाव है, बावजूद विवाद बढ़ता दिख रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के धनबाद जिला अध्यक्ष ही अपने एक्शन से कठघरे में खड़े हो गए है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने जिला अध्यक्ष लक्खी सोरेन और सचिव मन्नू आलम को नोटिस जारी कर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. जिला अध्यक्ष और सचिव  की कार्रवाई को केंद्रीय समिति के अधिकार का हनन बताकर गंभीर आरोप लगाया गया है. 

    4 जुलाई को जिला अध्यक्ष और सचिव ने लोकल नेताओ को दिया था नोटिस 
     
    दरअसल, 4 जुलाई को जिला अध्यक्ष और सचिव ने पूर्व विधायक फूलचंद मंडल, केंद्रीय कमेटी सदस्य धरनी धर मंडल और अशोक मंडल को नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में नेताओं पर लोकसभा चुनाव में दूसरे दल के उम्मीदवारों के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया गया था. आरोप  के कई कारण और कई स्थान बताये  गए थे, लेकिन जिला अध्यक्ष और सचिव के इस नोटिस को केंद्रीय नेतृत्व ने अनुशासनहीनता मानते हुए कहा है कि जिला कमेटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है. केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने धनबाद के जिला अध्यक्ष और सचिव को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि केंद्रीय कमेटी के सदस्यों को सीधे नोटिस जारी करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. धनबाद जिला कमेटी ने केंद्रीय समिति के अधिकार क्षेत्र का हनन किया है. 7 दिनों के भीतर जिला अध्यक्ष और सचिव से जवाब मांगा गया है. लिखित जवाब नहीं देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. 

    नोटिस जारी करने के बाद से ही शुरू था विवाद 
     
    धनबाद के  नेताओं को नोटिस जारी करने के बाद से ही झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला समिति में विवाद छिड़ गया था. वैसे भी पिछले कई सालों से धनबाद जिला झारखंड मुक्ति मोर्चा में विवाद था. काफी मशक्कत के बाद नई कमेटी का गठन हुआ. इसके पहले समानांतर दो समितियां चलती थी. झारखंड मुक्ति मोर्चा का धनबाद जन्मस्थली रहा है, लेकिन इसी जन्मस्थली में झारखंड मुक्ति मोर्चा का विवाद कभी ढीला पड़ता है तो कभी तेज होता है. नई समिति बनने के बाद लगा था कि विवाद खत्म हो जाएगा और जिला समिति सुचारू ढंग से अपना काम करेगी, लेकिन यहां भी नेताओं के बीच की आपसी कलह सामने आई है और अब तो केंद्रीय समिति ने मामले में सीधे तौर पर हस्तक्षेप किया है. ऐसा तो नहीं की नोटिस जारी करने वाले अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ ही कार्रवाई हो जाए. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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