धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी - 31 हैं रेस में, ब्रजेन्द्र बाबू ने दावा छोड़ा 

    धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी - 31 हैं रेस में,  ब्रजेन्द्र बाबू ने दावा छोड़ा 

    धनबाद (DHANBAD) : धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में कुल 31 लोग शामिल है.  कौन अध्यक्ष बनेगा ,यह तो अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन शनिवार को सर्किट हाउस में कांग्रेस के नेताओं ने अपना चेहरा चमकाने का कोई मौका नहीं छोड़ा.  सहायक प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी भावेश चौधरी शनिवार को बोकारो होते हुए धनबाद पहुंचे थे. 

    पहले तो सर्वसम्मति का प्रयास किया गया, लेकिन दावेदारों के उत्साह को देखते हुए नामांकन की प्रक्रिया शुरू की गई, जिन लोगों ने नामांकन किया है , उनमें  अशोक कुमार सिंह, मदन महतो ,संतोष सिंह ,सुरेश चंद्र झा, मनोज सिंह, सुल्तान अहमद, राशिद रजा अंसारी ,रविंद्र वर्मा ,डीके सिंह ,मुख्तार खान, राजेश्वर सिंह यादव ,पंकज मिश्रा, संजय महतो ,रवि चौबे, कामता पासवान ,धर्मेंद्र कुमार सिंह, शंकर प्रजापति, मंटू दास, वैभव सिन्हा ,कुमार संभव सिंह, संजय जायसवाल, प्रभात सुरोलिया, ललन चौबे, दुर्गा,दास, नवनीत नीरज, , राजू दास, दिलीप मिश्रा, बृजनंदन प्रसाद, एसपी यादव शामिल है.  सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले 10 सालों से कॉन्ग्रेस का जिला अध्यक्ष रहे ब्रजेन्द्र  प्रसाद सिंह इस बार दावेदारी नहीं किया है. मतलब कि वे जिला अध्यक्ष की रेस से बाहर है. 

     वैसे भी शनिवार को एपीआरओ ने स्पष्ट किया था कि नौजवानों ,महिलाओं और पार्टी के प्रति समर्पित लोगों में से ही  किसी का चयन किया जाएगा.   वैसे जो भी जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे ,उनके लिए धनबाद में पार्टी संगठन को मजबूत करना या टुकड़े -टुकड़े में बटे  कांग्रेसियों को एकजुट करना बहुत आसान नहीं होगा.  आपको बता दें कि पिछले 10 साल से लुबी सर्कुलर रोड स्थित धनबाद  जिला कांग्रेस कार्यालय में ताला बंद है.  इसको खुलवाने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन संभव नहीं हुआ.   विरोधी दल के नेता चुटकी लेते हैं और कहते हैं कि अभी तो  झारखंड की सरकार में कांग्रेस शामिल है और धनबाद के प्रभारी मंत्री का जिम्मा भी कांग्रेस के विधायक के पास ही है.  ऐसे में भी जिला कांग्रेस कार्यालय का ताला नहीं खुलना आश्चर्यजनक प्रतीत होता है.  धनबाद में कांग्रेस का गौरवशाली इतिहास रहा है लेकिन धीरे-धीरे कांग्रेस कमजोर होती गई.  इंटक और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की कमजोरी का असर भी कोयलांचल में पार्टी पर पड़ा.  अब देखना होगा कि नए जिला अध्यक्ष के बनने के बाद पार्टी का लाइन और लेंथ मजबूत होता  है या सब कुछ पुराने ढर्रे पर ही चलता रहेगा. 


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