RPF से तीखी बहस के बाबजूद स्टेशन परिसर के बाहर धरना पर बैठे रसिकपुर और आसपास के लोग,देखिए वीडियो

    RPF से तीखी बहस के बाबजूद स्टेशन परिसर के बाहर धरना पर बैठे रसिकपुर और आसपास के लोग,देखिए वीडियो

    दुमका(DUMKA): स्थानीय लोगों के विरोध के बाबजूद कुछ वर्षों पूर्व दुमका रेलवे स्टेशन परिसर में कोयला डंपिंग यार्ड बना दिया गया. पाकुड़ के अमडापाडा से सड़क मार्ग से कोयला दुमका रेलवे स्टेशन परिसर में डंप किया जाता है जहां से गुड्स ट्रेन से कोयला देश के अन्य प्रदेशों में भेजा जाता है. कोयला डंपिंग यार्ड शुरू होने से रसिकपुर सहित रेलवे स्टेशन के आसपास के लोगों को काफी परेशानी हो रही है. स्टेशन परिसर में कोयला का कण जमा रहता है. कोयला का कण लोगों के घरों में प्रवेश कर रहा है. सघन अधिवास में कोयला डंपिंग यार्ड शुरू होने से लोग बीमार पड़ रहे है.

    डंपिंग यार्ड स्थानांतरित करने की मांग पर चरणबद्ध आंदोलन कर रहे है स्थानीय लोग

     कोयला डंपिंग यार्ड को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग को लेकर रसिकपुर और आस पास के लोग चरणबद्ध आंदोलन चला रहे हैं. रेलवे के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन को कई बार आवेदन देने के बाबजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो स्थानीय लोगों ने बैठक कर यह निर्णय लिया कि प्रत्येक रविवार को रेलवे स्टेशन के सामने स्थानीय लोग धरना के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराएंगे. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रविशंकर मंडल ने कहा कि लगातार 37 सप्ताह से लोग रविवार को धरना दे रहे है. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मांगे पूरी नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

    RPF के साथ हुई आंदोलनकारियों की तीखी बहस

    रविवार को जब आंदोलनकारी धरना देने रेलवे स्टेशन के सामने एकत्रित हुए तो RPF के अधिकारी वहां पहुंच कर लोगों को धरना देने से रोकने का प्रयास किया. इस दौरान आंदोलनकारी और RPF के अधिकारी के साथ तीखी बहस भी हुई, इसके बाबजूद लोगों ने धरना के माध्यम से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा. इस बाबत RPF के अधिकारी कैमरा के सामने कुछ भी जानकारी देने से इनकार कर दिया.

    कभी भी हिंसक हो सकता है यह आंदोलन

    ऐसे में सवाल उठता है कि जनहित के मुद्दे पर स्थानीय लोगों का यह आंदोलन कब समाप्त होगा. इस मुद्दे पर रेलवे स्टेशन में पदस्थापित अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते है कि यह हाइलेवल मामला है. जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए है जबकि जिला प्रशासन द्वारा समय समय पर कोल डंपिंग यार्ड का निरीक्षण कर संबंधित एजेंसी को प्रदूषण पर अंकुश लगाने का निर्देश देकर अपने कर्तव्य का अंत कर लेते है. अगर समय रहते इसका समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में यह आंदोलन हिंसक रूप धारण कर सकता है.


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