देवघर: भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का पहला दिन संपन्न, झारखंड सरकार की नीतियों और नियत पर उठाए गए सवाल

    देवघर: भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का पहला दिन संपन्न, झारखंड सरकार की नीतियों और नियत पर उठाए गए सवाल

    देवघर(DEOGHAR): देवघर में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक का आज पहला दिन समाप्त हो गया. प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह सहित अन्य की मौजूदगी में आयोजित इस बैठक में कई विषयों पर विमर्श किया गया. सबसे पहले प्रथम सत्र के दौरान नेताओं को वैसे बयानबाजी से बचने का निर्देश दिया गया, जिससे पार्टी की छवि धूमिल होगी. आयोजित बैठक में आगामी 2024 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा की तैयारी में जुट जाने का भी निर्देश दिया गया. सभी पदाधिकारियों को बूथ जीतो चुनाव जीतो के अलावे शक्ति केंद्र को मजबूती के साथ पुनरीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया. बैठक में 35 लाख लोगों को नमो एप से जोड़ने का विशेष टास्क दिया गया. पहले दिन के बैठक समाप्त होने के बाद सभी को दिए गए टास्क पर लग जाने का निर्देश भी दिया गया.

    राजनीतिक प्रस्ताव भी किया गया पारित

    इस दौरान राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित की गई. सर्वसम्मति से पारित राजनीतिक प्रस्ताव को दुमका सांसद सुनील सोरेन द्वारा पढ़ा गया. पहले दिन का सम्पन्न हुए बैठक की जानकारी देने के लिए पार्टी ने पलामू सांसद बी.डी. राम को दिया. बी डी राम ने राजनीतिक प्रस्ताव के बारे में बताते हुए कहा कि देश मे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने के राह में अग्रसर है. कोरोना काल मे पीएम मोदी द्वारा किये गए काम को पूरी दुनिया ने भारत को लोहा माना. राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा पार्टी द्वारा झारखंड सरकार को ही आड़े हाथों लिया गया. सबसे पहले झारखंड सरकार को भ्रष्टाचारी सरकार का दर्जा दिया है. राजनीतिक प्रस्ताव में लिखा गया है कि प्रदेश में रिकॉर्ड भ्रष्टाचार हो रहा है. एक कर्मचारी से शुरू होकर भ्रष्टाचार अधिकारी, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचकर समाप्त हो रहा है. हेमंत सरकार में परिवारवाद की नई परिभाषा लिखी जा रही है. वहीं इस सरकार में आदिवासी, दलित, पिछड़ा, युवा, महिला, किसान, गरीब विरोधी सरकार है. स्थानीय नीति, नियोजन नीति पर झारखंड की वर्तमान सरकार की नियत साफ नहीं है.

    झारखंड सरकार पर उठाए सवाल

    वहीं उत्पाद नीति में सरकार बैकफुट पर है. कंपनी को शराब का ठेका देने के लिए नियम कानून को ठेंगा दिखाकर भारी गड़बड़ी की है. उत्पाद विभाग में भारी घोटाला के कारण नवंबर माह तक सरकार को लगभग 600 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है. राजनीतिक प्रस्ताव में झारखंड की बदहाल शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य व्यवस्था, बिजली की लचर व्यवस्था, पेयजल पर यह सरकार गंभीर नहीं है. वहीं बी डी राम ने बताया कि झारखंड की सरकार को केंद्रीय योजनाओं को भटकाना, लटकाना और अटकाने में महारथ हासिल की है. कुल मिलाकर पहले दिन बैठक के समापन के बाद भाजपा द्वारा झारखंड सरकार को किन-किन मुद्दों पर घेरा जाए, उसकी रणनीति तैयार की गई और इसी रणनीति के तहत आगामी चुनाव में भाजपा झारखंड फतह करेगी.

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा, देवघर  


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