सारंडा के कई गांवों में दंतैल हाथी का दहशत, जान बचाकर भागने को विवश हैं ग्रामीण

    सारंडा के कई गांवों में दंतैल हाथी का दहशत, जान बचाकर भागने को विवश हैं ग्रामीण

    चाईबासा (CHAIBASA): सारंडा के गांवों में एक बार पुनः दन्‍तैल हाथी ने आतंक मचाना प्रारम्भ कर दिया है. आठ सितम्बर की देर रात लगभग ग्यारह बजे के बीच एक दन्‍तैल हाथी ने किरीबुरु रेंज कार्यालय सारंडा के नवागांव के ग्रामीणों के खेत में लगा धान, मक्का को खाकर भारी नुकसान पहुंचाया है. इस दौरान उक्त हाथी नवागांव के लोगों के घरों तक भी आया. कई ग्रामीणों ने घर से सुरक्षित स्थान पर भाग अपनी जान बचाई. 

    पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

    उल्लेखनीय है कि इसी  हाथी ने पिछले दिनों किरीबुरु शहर में घुसने की कोशिश की थी. साथ ही  गुवा, हिरजी हाटिंग, बाईहातु, तितलीघाट, मारंगपोंगा आदि क्षेत्रों में उत्पात मचाया था. नवागांव निवासी गोविन्द तोरकोड ने बताया की उक्त हाथी मध्य रात्रि को जंगल से सबसे पहले सोमवारी तोरकोड के लगभग एक एकड़ खेत में लगी धान की फसल खा गया. उसके बाद वह बिरसा तोरकोड के घर के सामने की खेत में लगी मक्का की फसल को खा गया. फिर वह उसके भाई घांसीराम तोरकोड के घर में घुसते हुए गोविन्द तोरकोड के आंगन से बाहर निकला. हाथी को भगाने पर वह नवागांव स्कूल पहुंचा. वहां से हाथी भनगांव की तरफ निकल गया. 

    मुआवजे की मांग

    ग्रामीण गोविन्द ने कहा कि इस बार समय पर वर्षा नहीं होने की वजह से पहले ही फसल बर्बाद हो चुकी है. कुछ फसल लगी भी थी तो उसे हाथी खा जा रहा है. वन विभाग हाथियों द्वारा खाये और बर्बाद फसल के एवज में मुआवजा दें. साथ ही गांव क्षेत्र से इस हाथी को भगाकर आबादी से दूर सुरक्षित घने जंगलों में भेजने की कोशिश करे.  इसी हाथी ने पिछले महीने ही करमपदा क्षेत्र में तोपाडीह निवासी बीमल बारला की जान ले ली थी. आगे भी यह किसी ग्रामीण की हत्या कर सकता है. 

    जानिये झारखंड में हाथियों से नुकसान के आकड़े 

    झारखंड में हाथियों के कारण हर वर्ष ग्रामीणों को जान गंवानी पड़ती है। 2021 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक गत 11 साल में लगभग 800 लोगों की मौत हाथियों के कारण हुई है. पिछले आठ साल में विभिन्न कारणों से 60 हाथियों की मौत हो चुकी है. पांच हाथियों को तस्करों ने मार डाला, ट्रेन दुर्घटना से चार हाथियों, बीमारी से पांच हाथियों और आठ हाथी की मौत विभिन्न हादसों में हुई.  जबकि एक हाथी को वन विभाग के आदेश के बाद 2017-18 में मारा गया था. 14 हाथियों की अप्राकृतिक मौत हुई है. आठ हाथियों की मौत अधिक उम्र हो जाने के कारण हुई है. 

    रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, चाईबासा


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