Coal India : नई सैंपलिंग व्यवस्था का क्यों हो रहा विरोध, क्या डिमांड है, लघु उद्योग एवं छोटे व्यापारियों का, पढ़िए विस्तार से !

    Coal India : नई सैंपलिंग व्यवस्था का क्यों हो रहा विरोध, क्या डिमांड है, लघु उद्योग एवं छोटे व्यापारियों का, पढ़िए विस्तार से !

    धनबाद (DHANBAD) : देश की कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया में नई सैंपलिंग व्यवस्था के खिलाफ धीरे-धीरे गोलबंदी बढ़ने लगी है. कोल इंडिया की कई इकाइयों में आंदोलन शुरू हो गया है. कारोबारी नई व्यवस्था के खिलाफ पूरी तरह से आंदोलन के मूड में है. झारखंड इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन(JITA) ने भी अब आंदोलन में अपना कंधा लगा दिया है. वैसे तो कोयला कारोबारियों  के साथ-साथ अन्य लोग भी इस नियम को खत्म करने की मांग कर रहे है. लेकिन मैनेजमेंट अभी अपने निर्णय पर अडिग है. ऐसे में आगे उत्पादन और डिस्पैच कितना प्रभावित होगा, यह देखने वाली बात होगी.

    कोल इंडिया मैनेजमेंट को पत्र लिख दे डाली है बड़ी धमकी 

    झारखंड इंडस्ट्रीज़ एंड ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष अमितेश सहाय एवं महासचिव राजीव शर्मा, ने संयुक्त रूप से कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) को एक पत्र देते हुए पहली अक्टूबर, 2025 से लागू नए ई-नीलामी नियमों से खरीदे गए कोयले की कोल टेस्टिंग पर अपनाई गई विधि का विरोध किया है. इसके विरोध में चेयरमैन, कोल इंडिया लिमिटेड एवं निदेशक (मार्केटिंग) कोल इंडिया लिमिटेड को पत्र भेजा है. कहा गया है कि नियमों में Third party sampling, ग्रेड निर्धारण  के बाद अतिरिक्त भुगतान, बैंक गारंटी (बीजी/ई-बीजी) और इंडेम्निटी बॉन्ड की अनिवार्यता जैसे प्रावधान एमएसएमई कोयला व्यापारियों और कोक निर्माताओं के लिए असहनीय बोझ बन गए है.  चेतावनी दी गई है  कि उठाए गए कोयले का ग्रेड 7–10 दिन बाद बदलने से व्यापारी अपने ग्राहकों से मूल्य अंतर वसूल नहीं सकते, जिससे प्रति लॉट ₹800 से ₹2,000 तक का नुकसान होगा.   

    लघु उद्योग एवं छोटे कारोबारियों की टूट जाएगी कमर 
     
    इससे लघु उद्योग एवं छोटे व्यापारियों का वित्तीय दबाव बढ़ेगा और भागीदारी घटेगी.  इससे व्यापार करना दूभर हो जाएगा. मांग की गई है कि कोयला उठाए जाने के बाद तृतीय-पक्ष नमूनाकरण तुरंत वापस लिया जाए, नीलामी से पहले ही कोयले का ग्रेड घोषित किया जाए, ईएमडी कटौती रोका  जाए और अतिरिक्त बीजी/बॉन्ड की आवश्यकता समाप्त की जाए. स्पॉट नीलामियां तत्काल निलंबित की जाएं ,जब तक नीति में समीक्षा न हो जाए. पत्र में  सुझाव दिया गया है कि यदि नमूनाकरण जारी रखा जाए, तो केवल ग्रेड घटाया जाए, बढ़ाया नहीं, ताकि व्यापारियों पर अनावश्यक बोझ न पड़े.  JITA ने सीआईएल से तत्काल नियमों की तत्काल समीक्षा और वापसी की मांग की है.  इस संदर्भ में कोल इंडिया लिमिटेड तत्काल इस नए नियम को वापस करे अन्यथा भारत कोंकिंग कोल लिमिटेड से भी, सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड की तर्ज पर व्यवसायियों द्वारा कोयला उठाव बंद कर दिया जाएगा.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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