Coal India: पढ़िए कोल इंडिया - अनुषंगी कंपनियों में कार्यरत कर्मियों को कैसे लगा है जोर का झटका, धीरे से!

    Coal India: पढ़िए कोल इंडिया - अनुषंगी कंपनियों में कार्यरत कर्मियों को कैसे लगा है जोर का झटका, धीरे से!

    धनबाद (DHANBAD) : कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियों में कार्यरत कर्मियों को जोर का झटका, धीरे से लगा है. मेडिकल अनफिट के बदले नौकरी का मुद्दा अभी पेंडिंग ही रहेगा. हालांकि प्रबंधन का रवैया तो बतला रहा है कि अब यह बंद हो जाएगा. कोल इंडिया प्रबंधन इस पर चर्चा करने को भी तैयार नहीं है. दरअसल, कोल इंडिया एपेक्स जेसीसी की मंगलवार को कोलकाता में बैठक हुई. इस बैठक में कई मुद्दे उठे, यूनियन की ओर से मेडिकल अनफिट मामले में नौकरी का मुद्दा भी उठाया गया. लेकिन कोल इंडिया मैनेजमेंट इस मामले में चर्चा को भी तैयार नहीं हुआ. बता दें कि पहले मेडिकल अनफिट के आधार पर कोयला कंपनियों में नौकरी का प्रावधान था. जो कई वर्षों से अघोषित रूप से बंद है.  

    मैनजमेंट का संकेत साफ़ है कि यह लागू नहीं होगा-सूत्र 

    सूत्र तो यह भी बताते हैं कि मैनेजमेंट ने सांकेतिक रूप से साफ कर दिया है कि अब मेडिकल अनफिट के आधार पर आश्रित को नियोजन संभव नहीं है. बैठक में यूनियन की ओर से ग्रेच्युटी की राशि 25 लाख करने, दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा की राशि को 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख करने की भी मांग की गई. कोल इंडिया प्रबंधन ने इन मामलों पर विचार का भरोसा दिया है. बता दें कि देश की कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया में मेडिकल अनफिट के नाम पर आश्रित को नौकरी देने की व्यवस्था पर अघोषित रोक लगा रखी गई  है. 2018 के बाद किसी भी कर्मी के आश्रित को  इस व्यवस्था से नौकरी नहीं मिली है. आंकड़ों के अनुसार  2018 के बाद किसी के भी आश्रित को मेडिकल अनफिट के आधार पर नियोजन नहीं मिला है. नियम कहता है  कि बीमार कोयलाकर्मी को फिट होने तक 50% सैलरी का भुगतान होता रहेगा. या फिर मेडिकल अनफिट होने पर उसके आश्रित को नौकरी दी जाएगी. 

    अप्रत्यक्ष रूप से संसद में भी उठा है यह मामला 

    यह मामला अप्रत्यक्ष रूप से संसद में भी उठा है. लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कोयला मंत्रालय ने कहा है कि 2018 से किसी भी कोयलाकर्मी को मेडिकल अनफिट नहीं किया गया है. मतलब है कि 6 साल में कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी इकाईयों  में एक भी कर्मी मेडिकल अनफिट नहीं हुए है. इधर, कोयला मंत्रालय के इस जवाब पर यूनियन नेताओं का कहना है कि कोल इंडिया में 2018 से मेडिकल अनफिट के आधार पर आश्रित को नौकरी पर अघोषित रूप से पाबंदी लगा दी गई है. अब किसी कोयलाकर्मी को मेडिकली अनफिट किया ही नहीं जाता है. 2018 के पहले गंभीर रूप से बीमार कोयलाकर्मी खुद को मेडिकल अनफिट कराकर अपने आश्रित को नौकरी देते थे. काफी संख्या में ऐसे कोयलाकर्मी नौकरी कर भी रहे है.लेकिन 2018 के बाद घोषित रूप से तो नहीं, लेकिन अघोषित रूप से मेडिकल अनफिट के नाम पर नौकरी पर रोक लगा दी गई है.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो   


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