Coal India bonous: मजदूर संगठन एकमत हुए तो कर्मियों को तो मिला रिकॉर्ड बोनस, लेकिन ठेका श्रमिकों के हाथ आया झुनझुना !

    Coal India bonous: मजदूर संगठन एकमत हुए तो कर्मियों को तो मिला रिकॉर्ड बोनस, लेकिन ठेका श्रमिकों के हाथ आया झुनझुना !

    धनबाद (DHANBAD) : 2025 में कोयलाकर्मियों को रिकॉर्ड बोनस मिला है. बोनस की राशि कर्मियों के खाते में लगभग चली गई है. लेकिन सूत्र बताते हैं कि यह पहला मौका था, जब श्रमिक संगठन एकमत थे. कोयला श्रमिकों मजदूर संगठनो पर दबाव था. पिछले  रिकॉर्ड को देखते हुए उम्मीद की जा रही थी की बोनस एक लाख या उससे थोड़ा-बहुत कम मिल सकता है. लेकिन राशि एक लाख को लांघ गई. 1. 03 पर सहमति बनी. सूत्रों के अनुसार सब कुछ एक रणनीति के तहत मजदूर संगठनो ने किया.  

    आठ घंटे की कड़ी मेहनत के बाद हुआ फैसला 
     
    इसके लिए यूनियन प्रतिनिधियों को 8 घंटे की कड़ी मेहनत करनी पड़ी. बैठक में शामिल यूनियन एकमत थी. अगर एक या दो भी भटक जाती तो कोयलाकर्मियों को इतनी बड़ी राशि नहीं मिलती. प्रबंधन जरूर यह कोशिश किया कि एक-दो यूनियनों को किसी तरह से समझा-बुझाकर जिद से हटा लिया जाए, लेकिन सफल नहीं हुआ. नतीजा हुआ कि कोयलाकर्मियों को 1. 03 लाख बोनस पर सहमति देनी पड़ी. बीएमएस, एचएमएस, एटक,सीटू और इंटक के प्रतिनिधियों ने एकता दिखाते  हुए प्रबंधन पर दबाव बनाया. प्रबंधन जब राजी नहीं हुआ, तो एक साथ बैठक का बहिष्कार कर दिया. इस दौरान तीन बार तनातनी की स्थिति भी उत्पन्न हुई. बैठक की शुरुआत "पहले आप पत्ता खोले तो पहले आप अपना पत्ता  खोलें" से शुरू हुई. 

    प्रबंधन की हर चाल धराशायी हुई तब जाकर हुआ निर्णय 
     
    इसके बाद प्रबंधन ने कोल इंडिया की तीन सहायक कंपनियां बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए 90,000 रुपए देने से शुरुआत की. इसके बाद मजदूर संगठनों ने 1 . 30 लाख की डिमांड रख दिए. इससे  प्रबंधन इनकार कर दिया. प्रबंधन 98,000 देने पर अड़ा रहा. फिर तो नाराज पांचो यूनियनों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया. तीसरे दौर की बातचीत शुरू होने पर प्रबंधन 99 हजार तक पंहुचा. बाद में जब दबाव बढ़ा तो 1. 03 लाख देने पर सहमति बनी. यह अलग बात है कि कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद कर्मियों की  जितनी संख्या थी, उससे बहुत कम कर्मी आज रह गए है. कोयला उद्योग का प्रोडक्शन आउटसोर्सिंग कंपनियों के भरोसे हो रहा है. ऐसे में ठेका श्रमिकों के बोनस पर हर साल की तरह इस बार भी कोई निर्णय नहीं हुआ. उन्हें नियम का हवाला देकर झुनझुना थमा दिया गया.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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