Chhath in Jharkhand: छठ महापर्व संपन्न, झारखंड के अलग-अलग जगहों पर लोगों ने उगते हुए सूर्य को दिया अर्घ्य

    Chhath in Jharkhand: छठ महापर्व संपन्न, झारखंड के अलग-अलग जगहों पर लोगों ने उगते हुए सूर्य को दिया अर्घ्य

    रांची(RANCHI): छठ महापर्व में आखरी दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया है. रांची के सभी घाटों का नज़ारा काफी मनमोहक था. सुबह होते ही सभी घाटों पर व्रती ने अर्घ्य दिया. सूर्य को अर्घ्य देने के समय व्रती के अलावा आस पास के लोग बड़ी संख्या में घाट पर पहुंच कर छठ व्रतियों का सहयोग भी करते हैं. कई संगठनों की ओर आए छठ घाटों पर चाय पानी की भी व्यवस्था की गई थी. 

    पूर्व सीएम रघुवार दास ने उदीयमान सूर्य को दिया अर्घ्य

    जमशेदपुर में उदते हुए भास्कर को अर्घ्य देते हुए लोक आस्था का महापर्व छठ का समापन हो गया. जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर में सूर्य मंदिर छठ घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. जहां सभी छठ व्रत धारियों ने उदयीमान भास्कर को अर्घ्य देकर सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना की. वहीं इस मौके पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने पूरे परिवार के साथ अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की. साथ ही सूर्य मंदिर प्रांगण में स्थित हवन कुंड में पूरे परिवार के साथ हवन भी किया. वही यहां आए सभी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर अपने घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. लोक आस्था के महापर्व के समापन के उपरांत झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि भगवान भास्कर इतनी शक्ति प्रदान करें कि वे जन कल्याण कर सकें. उन्होंने कहा कि भगवान भास्कर की उपासना करने से शरीर में नूतन ऊर्जा की प्राप्ति होती है. इस ऊर्जा को जनकल्याण में लगानी चाहिए.

    व्रतियों ने किया डीसी और एसपी का शुक्रिया

    वहीं लोहरदगा में भी लोकआस्था का महापर्व छठ उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ सम्पन्न हो गया. इस मौके पर सीठियो घाट में सामुहिक आरती भी की गई. लोहरदगा में शांति पूर्ण तरीके से छठ संपन्न होने पर डीसी वाघमारे प्रसाद कृष्ण और एसपी आर रामकुमार ने जिलेवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया है.

    36 घंटे का निर्जला उपवास खत्म

    खरना क प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही व्रतियों का 36 घण्टे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है.वहीं तीसरे दिन सभी व्रती दउरा सुप लेकर घाट पहुंचती है.कुछ व्रती घाट पर ही रात बिताती है तो कुछ घर चली जाती है.लेकिन जैसे ही सुबह 3 बजता है सभी वापस अपने अपने घाट पर पहुंच कर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देती है.इसी के साथ निर्जला उपवास भी खत्म होता है और आस्था का महापर्व छठ भी सम्पन्न.

     

     


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