गोड्डा: स्थान,दो पुतलों का दहन ! एक मुख्यमंत्री तो दूसरा प्रधानमंत्री,अशांति फैलाने का प्रयास तो नही

    गोड्डा: स्थान,दो पुतलों का दहन ! एक मुख्यमंत्री तो दूसरा प्रधानमंत्री,अशांति फैलाने का प्रयास तो नही

    गोड्डा(GODDA)यूं तो संविधान में विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को समान रूप से दिया गया है.आप अगर किसी का विरोध करना चाहें तो कानूनी दायरे में रहकर कर सकते हैं,बशर्ते आपको स्थानीय प्रशासन को सूचित करना होगा या आदेश लेना होगा.
    रविवार को दो अलग अलग संगठन एक ही वक्त में गोड्डा के कारगिल चौक पर पुतला दहन करने को पहुंच गए.इनमें एक दल प्रधानमंत्री का विरोध कर रहा था तो दूसरा मुख्यमंत्री का.और दोनों ही दल नारेबाजी करते हुए कारगिल चौक पर एक ही समय मे एकत्रित हो गए।चारों तरफ से सड़क जाम लोगों को सड़क पार करने को काफी मशक्कत करनी पड़ी.

    कौन कौन थे प्रदर्शनकारी संगठन

    प्रदर्शन करने वालों में एक तरफ राज्य की सत्ताधारी दल झामुमो के नेता एवम कार्यकर्ता थे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री का पुतला दहन करने पहुंचे .तो वहीं दूसरी तरफ आदिवासी छात्र संगठन आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की  एनकाउंटर के विरोध में CBI जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पंकज मिश्रा स्टीफेन मरांडी का पुतला दहन करने पहुंचे थे.गनीमत ये रही कि एक ही वक्त पर दोनों पुतला दहन करने पहुंचे थे और कोई हंगामा नही हुई.वरना अराजकता की स्थिति जरूर बन जाती.

    आखिर कैसे मिला दोनो संगठन को एक ही वक्त का समय
    अब जिस तरह की स्थिति गोड्डा के कारगिल चौक पर रविवार को हुई थी ,अगर एक भी दल के लोग थोड़ा भी उग्र होते तो स्थिति बेकाबू हो जाती।अब सवाल ये उठता है कि दोनों संगठनों को पुतला दहन करने का एक ही समय मे कैसे अनुमति दी गयी थी ?


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