BSNL ने मरीजों के इलाज में अटकाया रोड़ा, भुगतान के बाद भी बंद कर दी इंटरनेट सेवा,जानिए फिर क्या हुआ

    BSNL ने मरीजों के इलाज में अटकाया रोड़ा, भुगतान के बाद भी बंद कर दी इंटरनेट सेवा,जानिए फिर क्या हुआ

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SNMMCH में  बीएसएनएल ने इंटरनेट का कनेक्शन मंगलवार को काट दिया. इसके बाद तो मैनेजमेंट को सांप सूंघ गया. मरीजों की भारी भीड़ जुटी हुई थी लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा था. अस्पताल की पूरी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम बीएसएनएल के भरोसे पर थी. दूसरी किसी कंपनी का वहां लाइन नहीं है, नतीजा है कि इंटरनेट कनेक्शन कटने के बाद सारा काम ठप हो गया.

    मात्र 400 मरीजों का हुआ रजिस्ट्रेशन

    अधिकारियों की माने तो बीएसएनल का लगभग ₹2000 बकाया था लेकिन 22 दिसंबर को ही बिल जमा करा दिया गया था. बिल ट्रेजरी के माध्यम से जमा होता है. रजिस्ट्रेशन बंद होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बीएसएनएल से संपर्क किया और ट्रेजरी का चालान भेजा. इसके बाद बीएसएनएल ने इंटरनेट सेवा शुरू की. हालांकि दो-तीन घंटे में ही सेवा बहाल हो गई लेकिन हंगामा मच गया. मरीज से लेकर अधिकारी तक परेशान हो गए. आनन-फानन में भुगतान की कॉपी खोजी गई. बीएसएनएल को भेजा गया तब रजिस्ट्रेशन चालू हुआ. मात्र 400 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो पाया. विलंब होने के कारण अधिकांश चले गए थे. ठंड के कारण अस्पताल में 10:00 बजे के बाद मरीजों भीड़ होती है. 5 रजिस्ट्रेशन काउंटर चलते हैं लेकिन 10:30 बजे ही इंटरनेट सेवा बंद हो गई और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन  बंद हो गया. इस समय तक मात्र डेढ़ सौ मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो पाया था. घंटे बाद भी जब रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हुआ तो कतार में खड़े लोग लौटने लगे. आधे से अधिक लोग बिना इलाज कराए ही लौट गए. दोपहर 12:30 बजे के बाद इंटरनेट सेवा चालू हुई और रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया. अमूमन 1000 से अधिक मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं .रजिस्ट्रेशन होने के बाद उनका इलाज होता है. 

    बिना इंटरनेट सेवा के इलाज नहीं 

    बता दें कि यह अस्पताल भी ई सिस्टम से जुड़ गया है. इस कारण बिना इंटरनेट सेवा के अस्पताल में मरीजों का इलाज संभव नहीं होता . ई रजिस्ट्रेशन के लिए मरीजों को अपना मोबाइल नंबर देना पड़ता है लेकिन यहां पहुंचने वाले कई ऐसे मरीज होते हैं जिनके पास मोबाइल नहीं होता. मोबाइल नंबर नहीं देने के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाता है. कभी-कभी तो गार्ड या अन्य लोग दया दिखाते हुए अपना मोबाइल नंबर दे देते हैं, तब जाकर मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो पाता है. हालांकि इस व्यवस्था में सुधार के लिए प्रबंधन ने सुझाव मांगा है लेकिन अभी तक सुझाव नहीं पहुंचा है. देखना है आगे जिनके पास मोबाइल नहीं है उनके लिए क्या व्यवस्था बनती है.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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