बोकारो मुठभेड़ : ऐसे हुआ एक करोड़ के इनामी नक्सली का अंत, 2024 में गिरफ्तार हुई थी पत्नी, 2025 में मारा गया विवेक मांझी

    बोकारो मुठभेड़ : ऐसे हुआ एक करोड़ के इनामी नक्सली का अंत, 2024 में गिरफ्तार हुई थी पत्नी, 2025 में मारा गया विवेक मांझी

    धनबाद (DHANBAD) : 21 अप्रैल 2025 को एक करोड़ का इनामी नक्सली प्रयाग माझी उर्फ विवेक दा  मुठभेड़ में मारा गया. इसके पहले 2024 में पुलिस अभिरक्षा में ही उसकी पत्नी जया दी की मौत हो गई थी. जया दी  असाध्य रोग से पीड़ित थी. धनबाद के एक अस्पताल में वह नाम बदलकर इलाज करा रही थी. तभी इसकी सूचना गिरिडीह पुलिस को मिली. फिर मुखविरो से पुष्टि के बाद गिरिडीह पुलिस अस्पताल की घेराबंदी की और इलाज के दौरान ही उसकी गिरफ्तारी कर ली गई. 16 जुलाई, 2024 को उसकी गिरफ्तारी हुई थी. धनबाद  से उसे इलाज के लिए रिम्स रांची में भर्ती कराया गया था. जहां सूचना के मुताबिक सितंबर 2024 में उसकी मौत हो गई. वह भी 25 लाख की इनामी नक्सली थी. प्रयाग मांझी धनबाद के मनियाडीह  थाना क्षेत्र के दलुगोड़ा  गांव का रहने वाला था. बहुत कम उम्र में ही वह संगठन से जुड़ गया. इस वजह से उसकी पहचान भी मुश्किल थी. 

    बहुत कम उम्र में ही नक्सली संगठन में हो गया था शामिल 
     
    सूत्र बताते हैं कि बहुत कम उम्र में ही वह नक्सली संगठन में शामिल हुआ और उसके बाद आगे बढ़ता चला गया. जैसे-जैसे समय बीतता गया, संगठन में उसका कद बढ़ता चला गया. उसका दस्ता आधुनिक हथियारों से लैस रहता था. बता दें कि झारखंड में नक्सली अभियान को सोमवार की सुबह एक बहुत बड़ी सफलता मिली.  प्रयाग मांझी सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा में भी माओवादियों का बड़ा चेहरा था. गिरिडीह का पारसनाथ और बोकारो का लुगू पहाड़ तो उसके नाम से थर-थर कांपते थे. सूत्र बताते हैं कि प्रयाग मांझी भाकपा माओवादी केंद्रीय कमेटी का सदस्य था. वह संगठन के लिए रणनीति भी बनाता था और हमले की तैयारी भी करता था. फिलहाल वह नक्सली गतिविधियों को संगठित करने में लगा हुआ था. उसकी सक्रियता सीमित नहीं थी. वह झारखंड के गिरिडीह, बोकारो, लातेहार से लेकर बिहार, बंगाल, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ तक फैले नक्सली बेल्ट में बरसों तक सक्रिय रहा. सूत्र बताते हैं कि उसके खिलाफ केवल गिरिडीह में ही 50 से अधिक मामले दर्ज है.  

    संगठन में उसकी पहचान एक तेज-तर्रार रणनीतिकार के रूप में थी

    माओवादी संगठन में उसकी पहचान एक तेज तर्रार रणनीतिकार के रूप में थी. उसके दस्ते के पास एक-47, इंसास राइफल और कई विस्फोटक मौजूद थे. उसके साथ 50 से अधिक नक्सली रहते थे. महिला माओवादियों का दस्ता भी था. जो अलग-अलग इलाकों में काम करते थे. उसकी तूती कई इलाकों में बोलती थी. सोमवार की सुबह झारखंड के बोकारो जिले में हुए भीषण मुठभेड़ में विवेक दा सहित आठ नक्सली मारे गए है. रविवार की रात से ही पुख्ता सूचना पर जवानों ने इलाके को घेर रखा था. सोमवार को तड़के मुठभेड़ शुरू हुई. दोनों तरफ से गोलियां चल रही तह. अंत में जवान नक्सलियों पर भारी पड़े और एक करोड रुपए का इनामी विवेक दा  सहित अन्य को मार गिराया. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 

     


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