Big Breaking: डीसी के करवाई से व्यवसायियों में हड़कंप , रामगढ़ में उद्योगपतियों के द्वारा वन भूमि पर किया जा रहा था अवैध कब्जा

    Big Breaking: डीसी के करवाई से व्यवसायियों में हड़कंप , रामगढ़ में उद्योगपतियों के द्वारा वन भूमि पर किया जा रहा था अवैध कब्जा

    रामगढ़(RAMGARH): रामगढ़ जिले में उद्योगपतियों के द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा था. जिसकी शिकायत मिलने के बाद डीसी ने जांच शुरू की. 

    रामगढ़ जिले के रउता वन क्षेत्र में जमीन की फर्जी जमाबंदी के मामले में आदेश सुनाना बिल्ली के गले में घंटी बांधने जैसा था. लेकिन डीसी चंदन कुमार ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया. उन्होंने फैसला सुनाने से पहले दस्तावेजों की पूरी छानबीन की. यहां तक की जिन लोगों का उस जमीन पर दावा था, उन्हें बाकायदा नोटिस देकर बुलाया गया. पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई, ताकि कोई भी उनके फैसले पर उंगली ना उठा सके. जब 4-एच की कार्रवाई पर सुनवाई हो रही थी, उस वक्त एक-एक दस्तावेज की सच्चाई खंगाली गई. किस तरीके से वन क्षेत्र की जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उन दस्तावेजों पर मोहर लगाते चले गए. वर्ष 2004 के बाद के सैकड़ो दस्तावेज जमीन के दावेदारों ने पेश किए. लेकिन वे सारे दस्तावेज फर्जी साबित हुए. 4-एच की कार्रवाई की पहली सुनवाई मांडू आंचल में हुई थी. उस वक्त भी अंचल अधिकारी ने जमीन के दावेदारों से उनका जवाब मांगा था. उस वक्त भी जमाबंदी करने वाले लोगों ने अपने सारे दांव पेज आजमा लिए लेकिन फर्जी दस्तावेज तैयार करना उन लोगों को अब महंगा पड़ गया है. 

    रामगढ़ जिले में 400 एकड़ जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में 

    रामगढ़ डीएफओ नीतीश कुमार ने बताया कि रउता वन क्षेत्र में सिर्फ प्लांट मालिकों ने ही अपनी जमाबंदी नहीं करवाई थी. उनके साथ-साथ ऐसे कई रैयत हैं जिनका जमाबंदी वहां मौजूद हैं. उन सब के खिलाफ भी मामला दर्ज है. उनके खिलाफ भी जल्द ही आदेश पारित हो जाएगा. डीएफओ नीतीश कुमार ने बताया कि रामगढ़ जिले में 500 किलोमीटर स्क्वायर मीटर का बड़ा भूभाग वन क्षेत्र है. इनमें से 400 एकड़ जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है. जंगल की उस जमीन को मुक्त करने के लिए 900 से अधिक मामले अब तक दर्ज किया जा चुके हैं. हालांकि इनमें से अधिकांश अस्थाई रूप से ही अतिक्रमित किए गए हैं. स्थाई रूप से 40 एकड़ जमीन पर ही अतिक्रमण किया गया है. रउता वन क्षेत्र हो या कुजू वन क्षेत्र, स्थाई रूप से कब्जा करने वाले व्यवसायिक वर्ग ही है. 

    वैष्णवी प्लांट के प्रबंधक उज्जवल अग्रवाल ने क्या बताया 

    वहीं पूरे मामले को लेकर वैष्णवी प्लांट के प्रबंधक उज्जवल अग्रवाल ने बताया हम लोगों की जमीन ब्रिटिश काल के समय से है, जिला प्रशासन के द्वारा कैसे रद्द किया गया है हम लोग इसको देख रहे हैं. मौजा के खाता संख्या 29 के कुल 86 प्लॉट कुल रकबा 807.24 एकड़ भूमि खतियान में गैर मजूरवा खास दर्ज है. जिसमें 45 प्लॉटों रकबा 758.59 एकड़ किस्म जंगल झाड़ी दर्ज है. उक्त 45 प्लाटों में से 26 प्लॉट जिसका कुल रकबा 575.78 एकड़ है, वह वन विभाग के द्वारा अधिसूचित एवं सीमांकित वन है. 

     


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