दो धुर विरोधी वामपंथी और दक्षिणपंथी कैसे आए धनबाद में एक मंच पर, जानिये पूरा मामला
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धनबाद(DHANBAD): वामपंथी और दक्षिणपंथी दो धुव्र पर खड़े मिलते हैं. दूसरी पार्टियां भले भाजपा के साथ सरकार बना लें, या वामदलों के साथ एकजुट हो जाएं, लेकिन भाजपा और वामदल बहुधा एकसाथ नहीं दिखते हैं. वामपंथी और दक्षिणपंथी यूनियनों के विचार और उनका तौर-तरीका भी अलग-अलग होता है. कोयलांचल में वामपंथी और दक्षिणपंथी यूनियनें भी एक दूसरे की विरोधी रही हैं. लेकिन धनबाद में वामपंथी और दक्षिणपंथी एक मंच पर कैसे दिखलाई पड़ गए. बीसीसीएल की सीकेडब्ल्यू साइडिंग के 246 मजदूरों को रोजगार से हटाने के मामले ने वामपंथी और दक्षिणपंथी यूनियनों को दरअसल एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है. जानकर बताते हैं कि दोनों यूनियनों के लिए यह लड़ाई अस्तित्व का प्रश्न है ,इसलिए समझौतावादी कदम उठाये जा रहे है.
246 मजदूरों को रोजगार के लिए हो रही लड़ाई
बता दें कि सी के डब्ल्यू साइडिंग को बीसीसीएल प्रबंधन ने बंद कर उसे आउटसोर्सिंग कंपनी को दे दिया है. परिणाम हुआ है कि 246 मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और इसके खिलाफ मजदूर संगठनों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. उस आंदोलन में बिहार कोलियरी कामगार यूनियन एवं जनता मजदूर संघ (कुंती गुट ) ने अगुवाई की और आंदोलन के शुरुआती दौर में प्रबंधन ने तो इसे काफी गंभीरता से लिया, लेकिन अब जाकर मैनेजमेंट बैकफुट पर दिख रहा है. प्रबंधन पर यह भी दबाव था कि भौरा जीएम के ऊपर पानी की बोतल और शीशे का गिलास फेंकने के मामले में पुलिस में की गई शिकायत को वापस ले लिया गया है. इस वजह से भी प्रबंधन मानसिक रूप से दबाव में था और प्रश्नों का जवाब प्रबंधन को जुट नहीं रहा था.
बीसीसीएल के सीएमडी ने मामले में किया है हस्तक्षेप
इन सबके बाद बीसीसीएल के सीएमडी ने मामले में हस्तक्षेप किया और उन्होंने पूर्व विधायक व वामदल मासस के नता अरूप चटर्जी और भाजपा नेत्री रागिनी सिंह से अपने कार्यालय कक्ष में बातचीत की. बातचीत में यह भरोसा दिया कि एक कमेटी का गठन कर 246 मजदूरों को फिर से नियोजित करने का रास्ता निकाला जाएगा. साथ ही प्रबंधन द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे को भी वापस लेने पर विचार किया जाएगा. बता दें कि प्रबंधन की एफ आई आर के बाद मासस के जिला अध्यक्ष सहित पांच नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है , फिलहाल वह जेल में है.
36 का रिश्ता के बावजूद एक ही मंच पर
यहाँ यह भी कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि अरूप चटर्जी निरसा के पूर्व विधायक हैं और फिलहाल वहां अपर्णा सेनगुप्ता भाजपा से विधायक हैं. अपर्णा सेन गुप्ता और अरूप चटर्जी में राजनीतिक तौर पर 36 का आंकड़ा है और जैसी की सूचना है , अपर्णा सेनगुप्ता भी जनता मजदूर संघ (कुंती गुट ) में पदाधिकारी हैं. बावजूद दोनों मजदूर संगठन एक मंच पर आकर मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. इस लड़ाई को लेकर जितनी मुंह उ तनी बातें हो रही हैं, लेकिन दोनों संगठनों ने ठान लिया है कि 246 मजदूरों का नियोजन करा कर ही दम लेंगे. अब देखना दिलचस्प होगा कि परिणाम क्या निकलता है. वैसे बुधवार को सीके डब्लू साइडिंग में सभा कर रागिनी सिंह ने ऐलान किया कि हम लोगों को पहली जीत मिल गई है और आगे भी हम मजदूरों को नियोजन दिला कर विजय हासिल करेंगे.
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