किसके इशारे पर रूपेश की जमीन हड़प बना दिया चौक और फिर रख दी ताजिया, मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला

    किसके इशारे पर रूपेश की जमीन हड़प  बना दिया चौक और फिर  रख दी ताजिया, मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला

    रांची(RANCHI): झारखंड के गुमला जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. गुमला के बड़ाईक मोहल्ला में विशेष समुदाय के द्वारा रूपेश नामक व्यक्ति के जमीन पर चौक बना कर ताजिया रखने का दावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने किया है. इस मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं पर भी सवाल उठाते हुए सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. जिसमें ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है.     

    बाबूलाल मरांडी ने पत्र में लिखा है कि विगत 9 सितंबर को मोहम्मद साजिद अख्तर द्वारा रूपेश कुमार सिंह को यह ज्ञात हुआ कि उनकी गुमला शहर के वार्ड नंबर 14 आजाद बस्ती,रजा कॉलोनी स्थित उनकी पैतृक जमीन प्लॉट संख्या 79 रकबा 0.71 एकड़ में खाली परती पड़ी जमीन पर अहमद लेन ,आजाद बस्ती ,गुमला शहर निवासी मो नसीम,मो तफ़रेज,मो सलीम,मो कादिर ,मो नाजिर, मो सरवर आलम,मो जाहिद अंसारी,मो आरिफ अंसारी,मो सुहैल  द्वारा लकड़ी,बांस से निर्मित मुहर्रम में घुमाए गए ताजिया को उनके उपर्युक्त जमीन पर ईंट का चबूतरा बनाकर स्थापित कर दिया गया है.  इसमें एक नामजद आरोपी मो  आरिफ अंसारी झारखंड मुक्ति  मोर्चा जिला गुमला का सचिव है.  रूपेश कुमार सिंह ने गुमला थाना में एफआईआर भी दर्ज कराते हुए अवैध जमीन कब्जा और अवैध धार्मिक निर्माण की विधिवत सूचना दी .

    दुर्भाग्यजनक स्थिति यह है कि  रैयत को घटना की सूचना देने वाले मो साजिद को मुस्लिम समाज के चंद अगुवा लोगों के द्वारा जान से मारने तक की धमकी दी गई, शहर में खून खराबे की बात भी कही गई. स्थित यह हो गई है कि 23 दिन बीत जाने के बाद भी रैयती जमीन से स्थापित ताजिया को हटाया नहीं गया है.  प्रशासन भी मूकदर्शक बना हुआ है. और शांति व्यवस्था भंग होने की बात कर ऐसे आराधिक मामलों को तरजीह देने में जुटा हुआ है.

    इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार तुष्टीकरण और वोट बैंक के चश्मे से अपराध और अपराधियों को देखती है, कार्रवाई सुनिश्चित करती है.  राज्य के विभिन्न  स्थानों पर आए दिन घट रही ऐसी सांप्रदायिक तुष्टीकरण की वारदातें जिसका प्रकार भले अलग हो लेकिन भाव सभी का एक ही होता है में लगातार अप्रत्याशित वृद्धि हो रही.  अब तो राज्य की बहुसंख्यक हिंदू समाज यह समझने लगा है कि राज्य की सरकार उनकी जमीन, इज्जत आबरू,बहन बेटियों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल है.  

    आम जनता को अहसास हो रहा कि राज्य में बढ़ रही जेहादी मानसिकता जिसमे लव जिहाद,लैंड जिहाद, सभी शामिल हैं ने राज्य सरकार के संरक्षण  में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ाया है, जिससे सांप्रदायिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहे हैं.

    क्या राज्य सरकार की पुलिस इतने दबाव में है कि वो सच को सच नहीं कह सकती. अवैध कब्जे का अनुसंधान नहीं कर सकती?, अवैध कब्जा करने वालों से पूछ ताछ भी नहीं कर सकती,? आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकती? तो फिर वर्दी पहनकर उसे लज्जित करने का उसे न तो नैतिक अधिकार है,न संवैधानिक .

    मैं राज्य सरकार की पुलिस से भी आग्रह कर रहा हूं कि वे अपनी वर्दी की ताकत को पहचाने , उसे कलंकित मत करें.  और कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को मत दें अन्यथा राज्य को अराजकता की स्थिति में  जाने से फिर कोई नहीं रोक सकता. प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने बार बार राज्य सरकार को आगाह किया है.  लेकिन ऐसा लगता है कि पुलिस  प्रशासन राज्य सरकार का टूल्किट बन गया.  जबकि पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष और निर्भीक होना चाहिए.

    मैं चाहूंगा कि उपर्युक्त अवैध कब्जा की जांच कराकर अविलंब रैयती जमीन को कब्जा मुक्त कराते हुए दोषियों पर मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति नहीं हो अन्यथा भाजपा पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन करने केलिए बाध्य होगी.

    पत्र में कई जानकारी दी गई है. जिसमें आरोप पुलिस पर लगाया है.   

     


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