धनबाद भाजपा में विस्फोटक स्थिति, सबकी आकांक्षाएं चरम पर, क्यों बढ़ गई भाजपा सांसद -विधायकों की चुनौतियां !!


धनबाद(DHANBAD): धनबाद भाजपा में विस्फोटक स्थिति पैदा हो गई है. यह स्थिति निगम चुनाव को लेकर पैदा हुई है. वैसे तो महानगर अध्यक्ष चुनाव को लेकर भी विवाद हुआ था, लेकिन संजीव अग्रवाल को भाजपा का समर्थित उम्मीदवार घोषित होने के बाद पार्टी में टूट- फूट बढ़ गई है. भागा -भागी का खेल शुरू हो गया है. पार्टी को चुनौती भी मिल रही है. यह अलग बात है कि यह खेल पार्टी की सेहत को कितना नुकसान पहुंचाएगा, यह देखने वाली बात होगी। पार्टी के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि संजीव अग्रवाल के पक्ष में नामांकन करने वाले भाजपा से जुड़े सभी उम्मीदवारों को बैठा लिया जाए. हालांकि ऐसी संभावना दिख नहीं रही है. पार्टी यह कहकर बच रही है कि चुनाव कोई दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, लेकिन अगर भाजपा के लोग पार्टी की लाइन पर नहीं चलेंगे तो क्या पार्टी एक्शन लेगी या यूं ही छोड़ देगी। इसकी भी खूब चर्चा हो रही है. झरिया से भाजपा के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने बुधवार को अंतिम दिन नामांकन कर दिया। समर्थको का भरी जुटान भी था. इसके अलावे भी कई लोगों ने नामांकन करने की बात कही है.
भाजपा समर्थित संजीव अग्रवाल भी बुधवार को ही नामांकन किया
भाजपा समर्थित संजीव अग्रवाल भी बुधवार को ही नामांकन किया , अब आगे क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी। बता दें कि पार्टी और परिवार की चुनौतियों के बीच झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह धनबाद नगर निगम के मेयर पद पर नामांकन कर दिया है. मंगलवार की रात संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. कहा था कि धनबाद के विकास को लेकर जनता के बीच जाएंगे. उन्हें पूरा भरोसा है कि उन्हें सफलता मिलेगी. पूर्व विधायक संजीव सिंह के नामांकन पर कानाफूसी शुरू हो गई है. धनबाद में भाजपा उम्मीदवार को लेकर उलझ गई है. पार्टी ने संजीव अग्रवाल को अपना समर्थन दिया है. इसका नतीजा है कि पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल ने पार्टी ही छोड़ दी और अब पूर्व विधायक संजीव सिंह भी चुनाव मैदान में उतर गए. हालांकि संजीव सिंह के चुनाव लड़ने के कयास बहुत पहले से ही लगाए जा रहे थे. लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा उन्होंने मंगलवार को की.
मेयर पद को लेकर भाजपा में बगावत दिखने लगी है.
धनबाद में मेयर पद को लेकर भाजपा में बगावत दिखने लगी है. प्रदेश नेतृत्व ने संजीव अग्रवाल को भाजपा समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है.उसके बाद तो कई लोगों ने इस्तीफा दे दिया. पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल, शांतनु चंद्रा ने भाजपा से त्याग पत्र दे दिया है. अब पार्टी इन नेताओं को कैसे मनाएगी और संजीव अग्रवाल के रास्ते से कैसे कील कांटे हटाएगी, यह देखने वाली बात होगी.विधायक रागिनी सिंह के लिए भी पसोपेश की स्थिति पैदा हो सकती है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू इस मामले को कितनी चतुराई से सुलझा पाते हैं, इस पर भी सबकी नजर रहेगी.इधर ,भाजपा नेत्री रमा सिंह ने अपने फेस बुक पेज पर पोस्ट कर कहा है कि धनबाद के सभी समाज सेवियों की आकांक्षाएं चरम सीमा पर है और होना भी चाहिए , आख़िर क्यों न हो !! हमने भी दावेदारी की थी और किसी से परिचय की मोहताज नहीं हूँ ,आज अपने कर्मों से अपनी पहचान बनाई है,परंतु पार्टी ने समर्थन बड़े भाई संजीव अग्रवाल को दिया। हमने इसे सहृदय स्वीकार किया क्योंकि जो पार्टी के लोग हैं वो अपने स्वार्थ की राजनीति नहीं करते हैं और निरंतर पार्टी के फायदे और नुकसान को देखते हैं.
अपने ही बीच के लोग एक नहीं चारों हाथ पैर से बटोरने में लगे हैं
आज कुछ अपने ही बीच के लोग एक नहीं चारों हाथ पैर से बटोरने में लगे हैं, शीशे की चमक और हीरे की चमक में अंतर पहचान करना चाहिए,नुकसान ही नहीं बड़ा नुकसान हम सभी का होगा। फायदे में कोई एक होगा, जो बड़ी शान्ति पूर्वक आपके आपस में वोट काटने का इंतजार कर रहा है. उनके आने के बाद समझ में आयेगा कि काश! हमने अपने फायदे के लिए चुनाव में वोट काटने का काम न किया होता। नगर निगम के जो भी उम्मीदवार हैं ,वो कोई एक ही जीतेंगे, परन्तु जाति के आधार पर वोट काटने के लिए जो लोग तैयारी में लगे हैं, कोई धनबाद को पेरिस और लंदन बनाने का सपना देख रहे हैं, पर पता है जनता को कि हमारा धनबाद ज्यों का त्यों रहेगा पर जितने वाले अपना आशियाना और कमाई से पेरिस में घर जरूर ले लेंगे , कटु सत्य है. जनता को अपने स्वार्थ से ऊपर उठे उम्मीदवार चुनना होगा और बुद्धिमानी से काम लेना होगा,जो आपकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में सफल हो. समाजसेवी क्या मेयर , सांसद और विधायक बन कर ही काम कर सकते हैं क्या ?चिंतन करें और अपना विचार करें कि हमें क्या करना चाहिए।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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