48 निकाय, बड़ा सियासी दांव: क्या बीजेपी दोहराएगी इतिहास या बदलेगा खेल?


टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी इस बार भी अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा पाएगी या फिर उसे कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ेगा. खास बात यह है कि निकाय चुनाव से पहले ही बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है. आदित्य साहू के कंधों पर अब पार्टी की कमान है और उनके लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं माना जा रहा.
सूत्रों की मानें तो पिछले नगर निगम चुनावों में जिन मेयरों ने जीत दर्ज की थी, उनमें से ज्यादातर बीजेपी से जुड़े हुए थे. लेकिन इस बार मुकाबला पहले जैसा आसान नहीं दिख रहा. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुका है, जिससे चुनावी संघर्ष और भी दिलचस्प हो गया है. भले ही चुनाव तकनीकी तौर पर निर्दलीय हो, लेकिन सभी दल कोशिश में हैं कि एक-एक सीट पर अपने ही समर्थित उम्मीदवार को उतारा जाए. पार्टियां इसमें कितनी सफल होंगी, इसका फैसला तो वक्त ही करेगा.
बीजेपी के लिए भी आसान नहीं चुनावी राह
जहां एक ओर बीजेपी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन को एकजुट बनाए रखना भी आसान नहीं दिख रहा. कांग्रेस ने निकाय चुनाव की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी थी. झारखंड कांग्रेस प्रभारी राजू कई दौर की बैठकें कर चुके हैं. हालांकि प्रत्याशियों की घोषणा के मामले में झामुमो कांग्रेस से आगे नजर आ रहा है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झामुमो महागठबंधन में दबाव बनाने की रणनीति के तहत लगातार उम्मीदवारों की घोषणा कर रहा है. इसका आगे क्या असर पड़ेगा, यह कहना अभी मुश्किल है. उधर कांग्रेस ने भी अपने दावेदारों से फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और पार्टी में उम्मीदवारों की कोई कमी नहीं है.
महागठबंधन में दिख रहे हैं मतभेद के संकेत
महागठबंधन के भीतर खींचतान के संकेत झामुमो में भी दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधन का भविष्य किस दिशा में जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश से लौटते ही झामुमो निकाय चुनाव के लिए अपना अभियान और तेज करेगा. कांग्रेस भी पीछे नहीं है और उसने अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का दावा है कि पार्टी सभी 48 नगर निकायों में अपने कार्यकर्ताओं की जीत सुनिश्चित करेगी. उन्होंने यहां तक कहा है कि महाराष्ट्र जैसा परिणाम झारखंड में भी दोहराया जाएगा. बीजेपी लगातार दलीय आधार पर चुनाव कराने की मांग कर रही है और बैलेट पेपर से चुनाव का विरोध कर रही है. पार्टी का कहना है कि चुनाव ईवीएम से होने चाहिए, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा.
पिछले चुनाव में कौन-कौन बने थे मेयर? जानिए पूरी लिस्ट
अगर पिछले नगर निगम चुनावों पर नजर डालें तो आदित्यपुर नगर निगम से विनोद श्रीवास्तव विजयी रहे थे, जिन्हें बीजेपी से जुड़ा माना जाता है. हजारीबाग नगर निगम में रोशन तिर्की, गिरिडीह में सुनील पासवान, मेदिनीनगर में अरुणा शंकर, रांची में आशा लकड़ा और धनबाद में शेखर अग्रवाल ने मेयर पद पर जीत हासिल की थी. ये सभी बीजेपी से जुड़े बताए जाते हैं. वहीं चास नगर निगम से निर्दलीय उम्मीदवार भोलू पासवान विजयी रहे थे और देवघर नगर निगम से निर्दलीय रीता राज खबाड़े ने चुनाव जीता था.
इस बार क्या बदलेगा समीकरण?
इस बार का निकाय चुनाव कई मायनों में अलग माना जा रहा है. शहरी मतदाताओं के भरोसे बीजेपी को उम्मीद है कि उसका प्रदर्शन अच्छा रहेगा, लेकिन झामुमो भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में है. शहरी वोटरों को झामुमो कितना प्रभावित कर पाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.
फिलहाल इतना तय है कि सभी राजनीतिक दल पूरी तरह सक्रिय हैं. अब देखना यह है कि क्या एक बार फिर निकाय चुनाव में बीजेपी का दबदबा कायम रहेगा या झारखंड मुक्ति मोर्चा उसकी जीत की राह में सेंध लगाने में कामयाब होगा. फैसला जनता करेगी, लेकिन मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है.
4+