पति की लंबी उम्र की कामना का निर्जला व्रत करती हैं सुहागिन महिलाएं

    पति की लंबी उम्र की कामना का निर्जला व्रत  करती हैं सुहागिन महिलाएं

    टीएनपी डेक्स(TNP DESK)हर साल  कार्तिक मास  में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवां चौथ का पावन पर्व मनाया जाता है. उस दिन सभी सुहागिन व्रत  रखता है. हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है. सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को रखती हैं. करवा चौथ का व्रत निर्जला व्रत होता है. यानि इस व्रत में पानी का सेवन भी नहीं किया जाता है. करवा चौथ का व्रत चांद के दर्शन करते हुए अर्ध्य देकर तोड़ा जाता है. इस दिन महिलाएं पूरी तरह से सज-धज कर पूजा करती है.

    चांद देखकर महिलाएं करती हैं पूजा

    बता दें कि चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है. यही कारण है कि चांद को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है. वहीं चांद में सुंदरता, शीतलता, प्रेम, प्रसिद्धि और लंबी आयु जैसे गुण पाए जाते हैं, इसीलिए सभी महिलाएं चांद को देखकर पूजा करते हुए ये सभी गुण उनके पति में पाने की कामना करती है.   

    पतिव्रता सती सावित्री ने यमराज से मांगा था वरदान

    पौराणिक काल से ऐसी मान्यता है कि पतिव्रता सती सावित्री के पति सत्‍यवान के मृत्यु पर जब यमराज उन्हें लेने धरती पर आए. तभी सत्‍यवान की पत्‍नी ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस मांगने के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि वह उसके सुहाग को वापस लौटा दें. मगर यमराज ने उनकी एक ना सुनी. इस पर सावित्री अन्‍न जल त्‍यागकर अपने पति के मृत शरीर के पास बैठकर रूदन करने लगी. काफी देर तक सावित्री की जिद्द को देखकर यमराज को उन पर दया आया. जिसके बाद यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा. जिस पर सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस मांगा और उस तरह उन्हें पुन: पति सुख की प्राप्ती हुई.

    सास-बहु के बीच प्रेम का प्रतीक सरगी

    सरगी खाकर ही चरवा चौथ व्रत की शुरूआत होती है. बता दें कि सरगी एक भोजन की थाली होती है. जिसमें खाने की चीजें एक थाली में सजाई जाती है. जिसको खान के बाद दिनभर निर्जला उपवास रहा जाता है. फिर रात में चांद की पूजा करने के बाद ही खाया जाता है. चूंकि  सरगी  खाकर ही व्रत की शुरुआत की जाती है, इसलिए सरगी की थाली में खासतौर पर ऐसी चीजें  शामिल किया जाता  है जिसे खाने से दिन भर भूख और प्यास कम लगती है. साथ ही दिनभर एनर्जी बनी रहती. परंपरा के अनुसार सास अपनी बहू को थाल में सजा कर सरगी की सामग्री देती हैं, जिसमें पूजा की सामग्री भी शामिल रहती है.

     


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