जान पर है आफत, कोयला दीजिए सरकार !

    जान पर है आफत, कोयला दीजिए सरकार !

    धनबाद (DHANBAD)- झारखण्ड इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड एसोसिएशन (जीटा) ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अगर लोकल उद्योगों को कोयला मिलना सुनिश्चित नहीं किया गया तो एक-एक कर कोयलांचल के सभी उद्योग बंद हो जाएंगे. अभी कोल इंडिया ने सभी इंडस्ट्रीज का कोयला रोक कर पावर प्लांटों को प्राथमिकता के आधार पर कोयला देने का आदेश दिया है. इस कारण से सभी लोकल उद्योगों का कोयला बंद कर दिया गया है.

    लोकल उद्योग पर किल्लत की मार

    लोकल उद्योगों का कोयला बंद होने का नतीजा यह हुआ है कि पहले से ही वेंटिलेटर पर चल रहे कोयलांचल के उद्योगों के शटर बंद होने लगे हैं. बता दें कि कोयले पर आधारित यहां 150 से भी अधिक हार्डकोके उद्योग चलते थे. कोरोना काल में आधे से अधिक बंद हो गए. जो चल भी रहे हैं, वह पूरी क्षमता से नहीं चल रहे हैं. कोयले की किल्लत सबसे बड़ी वजह है. उद्यमी लगातार बीसीसीएल से कोयला देने की गुहार करते रहे हैं, लेकिन प्रबंधन पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है.

    बिजली संकट से बचान के लिए कोयला जरूरी

    एसोसिएशन के संरक्षक केदार मित्तल का कहना है कि यह सच है कि अधिक बारिश के कारण बीसीसीएल का उत्पादन घटा है. बिजली संकट से बचने के लिए पॉवरप्लांटो को कोयला देना जरूरी है. हमलोग उसका विरोध नहीं कर रहे हैं. हम तो केवल यह मांग कर रहे हैं कि पॉवरप्लांटो के साथ साथ लोकल इंडस्ट्रीज को भी कोयला दिया जाए ताकि कम से कम उद्योगों की चिमनिया जलती रहे. कोयलांचल को बेरोजगारी का दंश नहीं झेलना पड़े.

    कोल इंडिया का नादिरशाही फरमान

     अध्यक्ष अमितेश सहाय ने कहा कि कोल इंडिया के नादिरशाही फरमान के बाद बीसीसीएल ने लोकल उद्योगों को  कोयला देना पूरी तरह से बंद कर दिया है. उद्योग कैसे बचेंगे, मजदूरों का क्या होगा, इस पर तनिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है. केवल हार्ड कोक की बात करें तो प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक लोग निर्भर हैं. इनकी जान बचानी है तो कोयला लोकल उद्योगों को भी देना होगा.

    अब संकट नहीं झेल सकते उद्योग

    महासचिव राजीव शर्मा ने कहा कि धनबाद में कोकिंग कोल की बहुतायत है. पावर प्लांटों को कोकिंग कोल की जरुरत नहीं पड़ती है. ऐसे में लोकल उद्योगों को कोयला देकर उनके प्राण बचाये जा सकते हैं. हार्ड कोक उद्योग की चिमनिया अगर एक बार बंद हो गईं तो फिर से शुरू करने में कम से कम चार महीने का समय लगता है. कोरोना काल में सभी इस परेशानी को झेल चुके हैं ,अब संकट झेलने की स्थिति में उद्योग नहीं है.

    रिपोर्टअभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो चीफ, धनबाद

     


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