यहां 165 साल से निकलता दुर्गा विसर्जन का मशाल जुलूस, जानिए स्वतंत्रता आन्दोलन से क्या है वास्ता

    यहां 165 साल से निकलता दुर्गा विसर्जन का मशाल जुलूस, जानिए स्वतंत्रता आन्दोलन से क्या है वास्ता

    सिंहभूम(SNGHBHUM) में मां दुर्गा की आराधना और पूजा का इतिहास डेढ़ सौ साल से अधिक पुराना है. सबसे आकर्षक और ऐतिहासिक पूजा चक्रधरपुर की पुराना बस्ती की श्रीश्री आदि पूजा समिति की मूर्ति विसर्जन का परंपरा अनोखी है. यहां पर करीबन पांच टन की प्रतिमा को 120 लोगों द्वारा कंधों में ढोकर विसर्जन करते हैं. जहां पर प्रतिमा की ऊचांई 10 से 12 फीट रहती है. आदि दुर्गा पूजा समिति का विसर्जन जुलूस अपने आप में अनोखा है. इसे देखने के लिए दूर दराज के हजारों लोग विजयादशमी में पहुंचते हैं.

    प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन की झलक 

    मशाल जुलूस महाशक्तिमयी मां दुर्गा का प्रतीक है. यह परंपरा आज भी अनवरत जारी है. इसमें लोग प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन की झलक भी देखते हैं. औपचारिक रुप से सन 1912 में नगर की जनता को पूजा अर्चना का भार सौंपे जाने के काफी पहले राजघराने की स्थापना के लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व से ही यहां आदि शक्ति के रूप मां दुर्गा की पूजा विधिपूर्वक की जा रही है. वर्तमान में चक्रधरपुर शहर के पुराना बस्ती स्थित गुंडिचा मंदिर में आयोजित की जाती है. विसर्जन के लिए विशेष तौर पर मशाल बनाने की प्रक्रिया को पूरा किया जाता है. इसके लिए डंडे, मिटटी के बर्तन, गांठे, मिटटी तेल के मिश्रण से मशाल का निर्माण किया जाता है. जिसे बच्चे बूढ़े सब मिलकर बनाते हैं. पुरानी बस्ती में रहने वाले दिव्यांग विकास कुमार साहू विशेषकर इस कार्य में जुटे रहते हैं.

    यह है इतिहास

    1857 ई में अंग्रेज सरकार के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल संपूर्ण देश भर की भांति पोड़ाहाट क्षेत्र में भी उठा था. उस समय पोड़ाहाट नरेश महाराजा अर्जुन सिंह इस क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे. उस दौरान अंग्रेजों के साथ संघर्ष कर रहे प्रथम स्वतंत्रता सेनानी जग्गू दीवान समेत अन्य 42 लोगों को अंग्रेजों ने पकड़ कर फांसी दे दी थी. इस बीच महाराजा अर्जुन सिंह कई महीनों से भूमिगत हो गये थे. इसी दौरान दुर्गा पूजा आ गया. अंग्रेजों को मालूम था कि महाराजा अर्जुन सिंह राजमहल जरुर आएंगे.अंग्रेजों ने राजमहल को नाकेबंदी कर रखी थी. इसकी जानकारी राजा और जनता को हो गया. विजयादशमी के दिन अचानक असंख्य लोग मशाल और हथियार के साथ जनता राजमहल पहुंच गये. उसी बीच महाराज अर्जुन सिंह दुर्गा विसर्जन जुलूस में शामिल होकर पुनः भूमिगत हो गये. उसी परंपरा का आज भी चक्रधरपुर में मां दुर्गा पूजा के विसर्जन के दिन निर्वाह होता है. चक्रधरपुर प्रवास में पहुंचे विश्व हिन्दू परिषद् के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अलोक कुमार ने सालों से चली आ रही परम्परा के तहत विसर्जन को कायम रखने के लिए आदि पूजा कमिटी की सराहना की.

    रिपोर्ट : जयकुमार, चाईबासा


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