पेट की आग बुझाने के लिए पलायन करने को मजबूर हैं कोल्हान के बेरोजगार,बगैर रजिस्ट्रेशन के ट्रेन से रोजाना जा रहे सैकडों युवा

    पेट की आग बुझाने के लिए पलायन करने को मजबूर हैं कोल्हान के बेरोजगार,बगैर रजिस्ट्रेशन के ट्रेन से रोजाना जा रहे सैकडों युवा

    पश्चिम सिंहभूम(WEST SINGHBHUM)-झारखंड में रोजगार का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा रहा है. खनिजों से भरे इस राज्य में आज भी गरीबी है. बिहार से अलग होने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि झारखंड में तस्वीर बदलेगी, सरकार बदलती चली गयी, लेकिन झारखंड में रोजगार की तलाश में पलायन की तस्वीर नहीं बदली है. लौह अयस्क से भरे पड़े पश्चिम सिंहभूम जिले से मजदूर दूसरे राज्य में रोजगार की तलाश में जाने को मजबूर हैं.

    खनिजों की भरमार के बाद भी लोगों का पास नहीं है रोज़गार

    काम की तलाश में झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला को छोड़ दूसरे राज्य में भटकने को मजबूर हैं. पश्चिम सिंहभूम जिला जहां खनिजों की भरमार है.जहां 42 लौह अयस्क के खदान हैं लेकिन यहां लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है. अगर मिल भी गया तो उन्हें पूरी मजदूरी भी नहीं मिलती. जिले में रोजगार की इतनी कमी है कि क्या पुरुष, क्या महिलाएं सभी पलायन करने को मजबूर हैं. बढती महंगाई और गरीबी से तंग आ चुके लोग कोरोना के विषम परिस्थिति में भी पलायन  करने को मजबूर हैं.

    बगैर रजिस्ट्रेशन राज्य से बाहर जा रहे लोग

    भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री विजय मेलगांडी ने स्टेशन पहुंचकर जिले से पलायन कर दूसरे राज्य जा रहे इन लोगों से बात की. पता चला कि ज्यादातर लोग काम नहीं मिलने की वजह से राज्य छोड़ने को मजबूर हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन भी नहीं करवाया है. बगैर रजिस्ट्रेशन के बाहर जा रहे ये मजदूर अगर किसी मुसीबत में फंसते हैं तो इनकी परेशानी और बढ़ सकती है. इतने बड़े पैमाने पर लोग पलायन कर रहे हैं लेकिन इस पलायन पर सरकार की भी नजर नहीं है. बिना रजिस्ट्रेशन के पलायन करने वालों को सरकार जागरूक करने का भी कदम नहीं उठा रही है. हालाँकि विजय मेलगांडी ने अपना विजिटिंग कार्ड देकर मुसीबत के समय उन्हें याद करने को कहा हैं.

    पेट की आग बनी पलायन का कारण

    भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री विजय मेलगांडी ने बताया कि जिले में 42 लौह अयस्क खदानें हैं. जिसमें से मात्र पांच माइंस है जो पूरी तरीके से चल रही है. जबकि बड़ी संख्या में खदानें बंद पड़ी हुई हैं. इन खादनों को खोल दिए जाने से रोजगार और पलायन की समस्या का समाधान काफी हद तक हो सकता है लेकिन राज्य सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है. सेल के खदानों में भी कई पद रिक्त हैं जिसे भर दिया जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है. कोरोना की तीसरी लहर का डर सबके मन में समाया है लेकिन पेट की आग को बुझाने के लिए लोग पलायन करने को मजबूर हैं. वहीं खनिजों के भंडार पर बैठा पश्चिम सिंहभूम जिला से खनिज निकालकर बाहर से आये लोग मालामाल हो रहे हैं और स्थानीय वाशिंदे चंद रुपये के रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. ऐसे में पूरा मामला राज्य के लिए शर्म और चिंता विषय है.

    रिपोर्ट : जयकुमार,चक्रधरपुर,प0 सिंहभूम.

     


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