अंधविश्वास की पराकाष्ठा..मिट्टी और गोबर के लेप से मृत शरीर को जिंदा करने की कोशिश

    अंधविश्वास की पराकाष्ठा..मिट्टी और गोबर के लेप से मृत शरीर को जिंदा करने की कोशिश

    दुमका | 21वीं सदी में विज्ञान इतना विकसित हो चुका है कि हर छोटी-बड़ी समस्या चुटकियों में हल हो जाती है, लेकिन देश और प्रदेश के कई इलाकों में अभी भी अंधविश्वास चरम पर है। भूत-प्रेत और जादू-टोने के चक्कर में कई जिंदगियां तबाह हो गई हैं ऐसा ही अजबो गरीब तस्वीर देखने को मिली झारखंड के दुमका जिलें में जहां मृत युवती को होश में लाने के लिए परिजनों ने कुछ ऐसा किया जिसके बारे में इससे पहले कभी देखा-सुना नहीं गया। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें अलग क्या है। तो चलिए अब हम आपको बताते हैं कि इसमें क्या और कितना चौकाने वाला है दरअसल,  झारखंड के दुमका जिले में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि किस तरह एक मुर्दा को फिर से जिंदा करने के लिए अजीब तरीके अपनाएं जा रहे हैं।


    शव को जिंदा करने के लिए लगाया गोबर और मिट्टी का लेप 

    दुमका जिला के ग्रामीण क्षेत्र में अंधविश्वास चरम पर है। इसकी एक बानगी देखने को मिली गोपीकांदर थाना क्षेत्र के दलदली गांव के कमार टोला में। एक 18 वर्षीय युवती एलिजाबेथ हांसदा पर आकाशी बिजली गिर गयी जिससे उसकी मौत हो गयी। आनन फानन में परिजन उसे लेकर घर आये और फिर उसे होश में लाने के लिए कुछ ऐसा किया जिसके बारे में इससे पहले नहीं सुना गया था । घर वालों ने मिट्टी और गोबर का लेप तैयार किया और उस युवती के शरीर पर उसी तरह से लगाया जिस तरह से मिस्र में ममी को सुरक्षित रखने के लिए शव पर अलग अलग रसायनों का लेप लगाया जाता है। युवती के चेहरे को छोड़कर गोबर और मिटी के लेप से उसके पूरे शरीर पर एक मोटा लेयर लगा दिया गया। घर वाले इंतजार करने लगे कि युवती उठ कर बैठ जायेगी। पर ऐसा हुआ नहीं क्योंकि वज्रपात से युवती की पहले ही मौत हो चुकी थी।


    यहां अंधविश्वास है चरम पर, जागरूकता की घोर कमी
    यह घटना सोमवार के दोपहर तीन बजे के करीब की है, दो महिला जब खेत से काम कर घर वापस लौट रही थी ,इसी बीच दोनों व्रजपात के चपेट में आ गयी। इस घटना में 18 वर्षीय एलिजाबेथ हांसदा की मौत हो गई और जबकि दूसरी महिला होपनी मुर्मू झुलस गयी. सूचना मिलने पर गोपीकांदर थाना के थाना प्रभारी बिलकन बागे पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। ये पहली मर्तबा नहीं है जब झारखंड में इस तरह की घटनाएं सामने आयी हो, इससे पहले भी कई तरह की अंधविश्वास से जुड़ी अलग अलग घटनाएं सामने आ चुकी है। इसके बावजूद इन  इलाकों में जागरूकता कमी है।

    रिपोर्ट -पंचम कुमार झा/दुमका 


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