एक भगवान जिनके आगे अंग्रेज भी हलकान थे

    एक भगवान जिनके आगे अंग्रेज भी हलकान थे

    रांची(RANCHI): झारखंड के लिए भगवान माने जाने वाले धरती आबा बिरसा मुंडा को बड़ी श्रद्धा के साथ लोग याद करते हैं. पुण्यतिथि के मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है.9 जून, 1900 को उन्होंने वीरगति प्राप्त की थी.कोकर स्थित उनके शहादत स्थल पर आम और खास लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं. भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजो के खिलाफ उलगुलान शुरू किया था. लगान वसूली के खिलाफ उन्होंने मुंडा समाज को गोलबंद किया और संघर्ष के लिए प्रेरित किया. अंग्रेजों और भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व वाले समूह के बीच लगातार संघर्ष होता रहा. उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार भी कर लिया.

    निरंकुश सत्ता के खिलाफ संग्राम

    धरती आबा बिरसा मुंडा ने लोगों को संगठित होकर निरंकुश सत्ता के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया. यह संघर्ष झारखंड ही नहीं देश में आजादी के लिए हो रहे आंदोलन का एक प्रमुख घटनाक्रम रहा है. भगवान बिरसा मुंडा महज 25 साल की उम्र में आंदोलन के एक मारक तरीके को याद करते हुए अंग्रेजो के खिलाफ लोहा लिया और वीरगति को प्राप्त हुए. रांची स्थित पुरानी जेल में उन्होंने अंतिम सांस ली उनका समाधि स्थल कोकर स्थित डिस्टलरी पुल के पास स्थित है. झारखंड वासियों के लिए यह किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है.


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