निकलेगी रथ यात्रा जरूर लेकिन इस बार भी नहीं लगेगा रांची का प्रसिद्ध जगन्नाथपुर मेला, जानिये क्यों

    निकलेगी रथ यात्रा जरूर लेकिन इस बार भी नहीं लगेगा रांची का प्रसिद्ध जगन्नाथपुर मेला,  जानिये क्यों

    रांची(RANCHI)- भगवान जगन्नाथ की दो साल बाद रथयात्रा निकलेगी. लेकिन इस बार भी जगन्नाथपुर मेला नहीं लगेगा. जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है. जिला उपायुक्त ने जगन्नाथपुर मेला समिति की बैठक में कहा है कि आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आदेश के अनुसार मेला नहीं लग सकता है. ऐसा माना जा रहा था कि 2 साल कोरोना संकट के बाद इस बार जगन्नाथपुर मेला धूमधाम से लगेगा. राज्य सरकार के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों का समागम अभी प्रतिबंधित है. इसलिए जिला प्रशासन मेला लगाने की अनुमति नहीं दे रहा है. रांची के जिला उपायुक्त छवि रंजन ने इस संबंध में जानकारी दे दी है. पुरी के जगन्नाथ मेला के बाद इस क्षेत्र में यह सबसे प्रसिद्ध मेला है.1 जुलाई को रथ यात्रा निकलती है. इसके लिए जिला प्रशासन बड़े स्तर पर इंतजाम करता है. बड़ी संख्या में झारखंड बिहार ओडिशा और पश्चिम बंगाल से लोग इस मेला में भाग लेने आते हैं.

    नया रथ हो रहा तैयार 

    जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति के प्रथम सेवक सह उपाध्यक्ष ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव ने बताया है कि समिति ने रथ के जीर्णोद्धार कराने का निर्णय लिया है. इसे बिल्कुल नए रूप में ढाला जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, 20 फीट चौड़े और 20 फीट ऊंचे रथ की ऊंचाई भी 30 फीट करने की योजना है. कारीगरों से बातचीत हो गई है. रामकृष्ण मिशन टीवी सेनेटोरियम तुपुदाना के सचिव महाराज की ओर से 100 सीएफटी साल की लकड़ी रथ बनाने के लिए दी जा रही है. रथ बनाने में कुल 221 सीएफटी साल की लकड़ी की जरूरत पड़ेगी.स्वामी जगन्नाथ का 20 साल बाद नया रथ तैयार किया जा रहा है. पूरी के कारीगर रथ का निर्माण कर रहे हैं. इसके लिए कई संगठनों की ओर से सहयोग किया जा रह है. 

    क्यों निकाली जाती है यात्रा 

    मंदिर का निर्माण 25 दिसंबर 1691 को बड़कागढ़ के राजा ठाकुर ऐनी नाथ शाहदेव ने कराया था. 1976 में मंदिर ट्रस्ट बना. तब से वही देखरेख कर रहा है. 6 अगस्त, 1990 को अचानक इस मंदिर का एक हिस्सा टूट गया था. भगवान को कई दिनों तक बरामदे में विश्राम कराना पड़ा. लेकिन 1991 में बिहार सरकार और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया.इस पर्व को मनाने के पीछे कुछ मान्यताएं है. जिसमें से सर्वप्रचिलित मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा नें भगवान जगन्नाथ से द्वारका दर्शन करने की इच्छा जाहिर की.  जिसके बाद भगवान ने सुभद्रा को रथ  से भ्रमण करवाया तब से हर वर्ष इसी दिन जगन्नाथ यात्रा निकाली जाती है.  


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