सीएम का आदेश : दुमका में 'क्रैकडाउन , धनबाद में अब भी जारी है बेखौफ कोयले का अवैध खनन और तस्करी


धनबाद(DHANBAD) - रांची में ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे राज्य में हड़कंप है. दुमका जिला प्रशासन खनिज संपदा की लूट के खिलाफ 'क्रैकडाउन अभियान' चला रहा है. प्रशासनिक अमला सड़क पर है और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां हो रही है. इसके ठीक उलट धनबाद में कोयले की 'लूट' पहले की तरह ही चल रही है. धनबाद में 'क्रैकडाउन अभियान' की कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है.
कोयला चोर और तस्कर बेधड़क पहले की तरह अपना काम कर रहे है. अवैध उत्खनन में लोग मर रहे हैं फिर भी यह धंधा मंदा नहीं हो रहा है. बेखौफ धंधा का परिणाम है रामकनाली में बीसीसीएल एरिया 4 के पास अंबे माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के ओपन कास्ट प्रोजेक्ट के नजदीक चल रहे अवैध उत्खनन के दौरान गुरुवार को हादसा हो गया, अवैध खनन के क्रम में चाल धंस गई और घटनास्थल पर ही एक की मौत हो गई . जबकि 3 से अधिक लोग घायल हो गए. सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि आनन-फानन में मृतक के शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया.
मुख्यमंत्री तक कह चुके हैं कि अवैध उत्खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बावजूद 'रिमोट' से धंधा चलाने वाले लोग निडर होकर कोयलांचल में बेधड़क अवैध खनन करा रहे है. कोयले की खपत स्थानीय उद्योगों के अलावा फर्जी जीएसटी पेपर पर दूसरे प्रदेशों को भी भेज रहे है.कोयला चोर इतने ठीठ और मनबढ़ू हो गये है कि टीम पर रोड़ेबाजी कर दे रहे है. सिजुआ की तेतुलमुडी में शनिवार की रात सीआईएसफ की टीम पर रोड़ेबाजी की गई. वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. अतिरिक्त बल आने के बाद ही चोर भागे.
कतरास इलाके में अगर इस साल की घटनाओं की बात करें तो 8 जनवरी' 22 को डेको आउटसोर्सिंग के जरलाही पैच में युवती की मौत हो गई थी और 3 लोग घायल हुए थे. 21 फरवरी' 22 को डेको के ही फुलारीटांड पैच में एक महिला की मौत हो गई थी, 2 घायल हुए थे. 8 मार्च '22 को गणेशपुर में अवैध उत्खनन में महिला की मौत हो गई थी, 6 घायल हुए थे. 31 मार्च 22 को मुराईडीह के 4ए पैच में महिला और युवती की मौत हो गई थी. 8 अप्रैल '22 को महुदा के जामडीह में खदान का मलबा गिरने से युवती समेत दो मारे गए थे. 30 अप्रैल' 22 को बरोड़ा के बंद डेको पैच में मलबे में दब कर छह घायल हो गए थे. 27 मई '22 को कतरास के रामकनाली में एक की मौत हो गई है, जबकि 3 घायल हुए थे. . इस काले धंधे में अकूत कमाई का असर है कि निरोधात्मक कार्रवाई करने वाली एजेंसियां भी चुप बैठी है.
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