जमीन के लिए अनशन पर बैठे परिवार के मुखिया की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती


धनबाद(DHANBAD): गांधी के रास्ते के आंदोलन की धनबाद में 'अग्नि परीक्षा' हो रही है. देखना होगा कि न्याय मांगने वाला हारता है या अत्याचार करने वाला विजयी होता है. मामला बाघमारा से जुड़ा हुआ है. बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो से प्रताड़ित परिवार पिछले 4 मई से अनशन पर है. लगातार न्याय मांग रहा है, वह कह रहा है कि मुझे सिर्फ न्याय चाहिए लेकिन न्याय उसे नहीं मिल पा रहा है. अशोक महतो का परिवार परेशान-तबाह जरूर है लेकिन बापू के रास्ते को छोड़ने को तैयार नहीं है.
वह परिवार कहता है कि जब बापू ने अनशन को हथियार बनाकर देश को आजाद करा लिया तो हमें भी न्याय जरूर मिलेगा, वक्त चाहे जितना भी लग जाये. इस परिवार के मुखिया अशोक महतो की बुधवार की रात तबीयत बिगड़ गई, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. अभी वह अस्पताल में ही है लेकिन न्याय मांगने की आवाज में उनकी कोई कमी नहीं है. शरीर जरूर कमजोर हो गया है लेकिन साहस में कोई कमी नहीं आई है. वह कहते हैं कि अब इस परिवार को या तो न्याय मिलेगा या धरना स्थल से ही उनकी अर्थी उठेगी. बाघमारा जा कर करेंगे भी क्या, जो रोजी-रोटी का साधन था वह छीन लिया गया है. टैंकर दुकान के सामने लगा दिया गया है. ईंट गिरा दी गई है.
प्रशासन और नेताओं के लिए भी ये आंदोलन एक चुनौती
ऐसी हालत में वहां जाकर वह लोग खाएंगे क्या, इससे बढ़िया है कि अनशन स्थल पर ही प्राण त्याग दें. अस्पताल में ही मौजूद पिता को देखने गई, उनकी बेटी सुनीति कुमारी का कहना है कि केवल प्रशासन के लिए ही नहीं, नेताओं के लिए भी उनका आंदोलन एक चुनौती है. क्योंकि किसी भी दल के नेता हो, उनका भाषण गरीबों से शुरू होता है और गरीबी पर ही आकर खत्म हो जाता है लेकिन एक गरीब परिवार 4 मई से अनशन पर बैठा है लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. नेता क्या सामाजिक कार्यों के लिए आते हैं या खुद की भलाई करने के लिए. सुनीति ने पूरी व्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है. बता दें कि बाघमारा के रामराज मंदिर के सामने अशोक महतो की एक दुकान है, उस दुकान पर कथित रूप से विधायक ढुल्लू महतो कब्जा करना चाहते हैं, इसलिए उन्हें बेदखल करने के लिए पहले दुकान के सामने टैंकर लगवाया गया, आगे-पीछे ईंट गिरा दिया गया.
अधिकारी बस जांच कर लें
जमीन उनकी है फिर भी उन्हें दुकान खोलने नहीं दिया जा रहा है. उनकी तो सिर्फ एक छोटी सी यही मांग है कि प्रशासन या राज्य सरकार के अधिकारी जांच करें, उनका दावा गलत है तो उसे गलत बता दें. लेकिन अगर उनका दावा सही है तो वह सिर्फ दुकान खुलवाने की अनुमति मांग रहे हैं जिससे उनका पेट चल सके. बच्चे पढ़ सके, अगर इस आंदोलन के चलते अशोक महतो के दो बेटे और एक बेटी की पढ़ाई बाधित होती है या कोई अनहोनी होती है तो फिर इसके लिए जवाबदेह तो निश्चित रूप से पूरी व्यवस्था होगी, पूरा समाज होगा.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश, धनबाद
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