धनबाद में अंग्रेजों के ज़माने का काजू बागान ,अब सरकार और वन विभाग को चिढ़ा रहा है मुंह

    धनबाद में अंग्रेजों के ज़माने का काजू बागान ,अब सरकार और वन विभाग को चिढ़ा रहा है मुंह

    धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल में काजू बागान. जी हां- चौंकिए मत यह बिल्कुल सच है. धनबाद के बरवड्डा  से केवल 10 किलोमीटर दूर स्थित है यह काजू बागान.  वैसे तो इस काजू बागान के लगाने वाले अंग्रेज थे. लेकिन उसके बाद यह काजू बागान अनाथ हो गया. इसका रखरखाव करने वाला कोई नहीं है. ग्रामीणों की बातों पर भरोसा करें तो पहले यहां 5000 से अधिक पौधे थे लेकिन अब काजू के केवल 500 से 1000 पौधे ही बचे है. वह भी, वृक्ष काफी पुराने हो गए है. वृक्षों का रखरखाव भी नहीं होता है. काजू के फल को गांव के बच्चे तोड़ कर घर ले जाते हैं. तवे पर भून कर खाते हैं और कुछ बर्बाद कर देते हैं. उनके लिए यह काजू खिलौना की तरह है ,जबकि सच्चाई यह है कि सरकार या वन विभाग इसकी देखने की ठोस व्यवस्था करें तो यह आकर्षक पर्यटन स्थल भी बन सकता है. ग्रामीण गणेश महतो ने बताया कि अभी यह काजू बागान लगभग 20 एकड़ में फैला हुआ है जबकि एक समय में यह डेढ़ सौ एकड़ का हुआ करता था. वन विभाग की यहां डेढ़ सौ एकड़ जमीन है. 

    काजू बागान पूरी तरह से अनाथ

    ग्रामीण आजाद अंसारी ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है. आज यह काजू बागान पूरी तरह से अनाथ है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. नए पौधे भी नहीं लगाए जा रहे है. पुराने का रखरखाव भी नहीं होता है. ऐसे में  काजू बागान कितने दिन तक रहेगा, यह देखने वाली बात होगी. लेकिन सरकार या वन विभाग चाहे तो इसका कायाकल्प हो सकता है. वन विभाग के अधिकारी काजू बागान के अगल-बगल में जंगली वृक्ष लगा देते हैं ,जिन्हें बाद में अगल- बगल के गांव वाले काट कर लेकर चले जाते हैं. उन लोगों ने मांग की थी कि काजू के पौधे ही लगाए जाएं लेकिन इस ओर कभी ध्यान दिया ही नहीं गया.

    रिपोर्ट ; शाम्भवी सिंह, धनबाद


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