80 फीसदी आदिवासी बहुल गुमला के ग्रामीण क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर, फाइलों में दिखता है विकास

    80 फीसदी आदिवासी बहुल गुमला के ग्रामीण क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर, फाइलों में दिखता है विकास

    गुमला(GUMLA): गुमला जिला झारखंड का एक ऐसा जिला है जहां पर 80% आबादी पूरी तरह से आदिवासी समुदाय की है. बावजूद इसके इस जिले का विकास सही रूप से नहीं हो पाना, इस बात की ओर इशारा करता है कि झारखंड का निर्माण जिस उद्देश्य से हुआ था, वह शायद आज भी सफल नहीं हो पाया है. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सुविधा की बात तो दूर है, मूलभूत सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिल पाई है. ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का अभाव है. लोगों के लिए रोजगार का अभाव है. साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आज तक ना तो सही रूप से पीने की पानी की व्यवस्था हो पाई है. ना ही सभी ग्रामीणों के लिए घर का ही निर्माण हो पाया है. ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

    सरकार के पैसे का कोई अता-पता नहीं

    स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकार की ओर से विकास के नाम पर जो पैसा खर्च किया जाता है, पता नहीं वह कहां चला जाता है. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता संदीप प्रसाद की मानें तो सरकार की ओर से लगातार यह दावे किए जाते हैं, गांव का विकास कर लोगों को बेहतर जीवन जीने के लिए अवसर प्रदान किया जाएगा. लेकिन, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति जो है वह काफी पिछड़ी हुई है. लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि सरकार को ध्यान देना चाहिए और सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है. इसका परिणाम है कि झारखंड में लंबे समय बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों की ऐसी स्थिति बनी हुई है. जिले के 12 प्रखंडों की स्थिति का आकलन करेंगे तो अधिकांश प्रखंडों में इसी तरह के हालात देखने को मिल सकते हैं. लोगों ने इसको लेकर सवाल खड़े किए हैं और प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बेहतर करने के लिए मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने के साथ ही साथ लोगों की जीविका को और बेहतर संचालित करने के लिए उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए.

    इलाके में बेरोजगारी की बड़ी समस्या

    कई इलाकों में तो लोगों को आज भी सही रूप से दो वक्त का भोजन भी नहीं मिल पाता है. क्योंकि, इलाके में रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सही रूप से दो पैसा की कमाई नहीं कर पाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की उपलब्धता तो है लेकिन सिंचाई की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण लोग खेती नहीं कर पाते हैं. केवल बारिश के समय ही लोग खेती कर पाते हैं. इसके कारण उनका सही रूप से विकास नहीं हो पा रहा है.

    सामाजिक कार्यकर्ता अनिरुद्ध चौबे की मानें तो सरकार के द्वारा जो पैसा दिया जाता है, वह पैसा कल तक केवल फाइलों में ही खर्च होता था, लेकिन वर्तमान उपायुक्त सुशांत गौरव की ओर से जिस तरह से जमीनी स्तर पर विकास करने की कोशिश की जा रही है. उससे लगता है कि इलाके की तस्वीर बदल सकती है और लोगों को सही रूप से विकास योजनाओं का लाभ मिल सकता है. वहीं जिले के डीसी सुशांत गौरव ने कहा कि विकास एक पूरी तरह से प्लानिंग बनाकर किया जाने वाला काम है. इसके लिए लंबे समय तक काम करना होगा तभी जाकर गांव का सर्वांगीण विकास हो पाएगा. उन्होंने बताया कि लगातार गांव के विकास को लेकर हर स्तर पर पहल की जा रही है. लोगों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही साथ ग्रामीणों को विशेष रूप से सुविधा उपलब्ध कैसे कराई जाए, इस दिशा में भी काम किया जा रहा है. ग्रामीणों को खास करके आवास, रोटी और कपड़ा की व्यवस्था सही रूप से हो सके इसके लिए पूरी तरह से कोशिश की जा रही है.

    रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह, गुमला  

     


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