इबादत और जहन्नुम से छुटकारे की रात है शब ए बारात : अहमद अली खान

    इबादत और जहन्नुम से छुटकारे की रात है शब ए बारात : अहमद अली खान

    पलामू (PALAMU) : बड़ी मस्जिद भाई बिगहा, हैदरनगर के खतीब व इमाम मौलाना अहमद अली खान रजवी ने शब ए बारात के मौके पर युवाओं व आम लोगों से आह्वान किया है कि वो इबादत की रात को खूब इबादत करें और अपने गुनाहों के मगफिरत की खूब दुआ करें. इस तरह पक्की सच्ची तौबा करें कि अल्लाह ताला राजी हो जाए. उन्होंने कहा कि शाबान की 14वीं रात गुनाहों से माफी की रात है. 18 मार्च को सूर्यास्त (मगरिब) के बाद अल्लाह तआला इस रात में की गई दुवाओं को कबूल करता है. अपने बन्दों की हर नेक मुरादों को पूरी करता है. मौलाना अहमद अली खान ने बताया कि इस रात को अल्लाह तआला गुनाहगारों को गुनाहों से निजात देता है. यह रात जाग कर इबादत करने वाली रात है. इस रात में कुरान शरीफ की तिलावत अधिक से अधिक करने को कहा गया है. इसके अलावा तस्बीहात के साथ  नफील नमाजों का खास एहतेमाम करें, अल्लाह ताला का खूब जिक्र करें, सदका निकालें.

    सालों भर का हिसाब इसी रात होता है

    इसी रात को साल भर के हिसाब किताब होते हैं. इस रात बे हिसाब गुनहगारों के गुनाहों की माफ़ी मिलती है मगर कुछ ऐसे लोग भी हैं के उनकी दुवा कबूल नहीं होती है. जैसे शराब पीने वाले शराबियों की एक दूसरे से बोग्ज और किना रखने वाले की और रिश्तेदारों के साथ बुरा बर्ताव करने वाले लोगों की माँ बाप को दुख दे कर सताने वालों की इस मुबारक रात में भी दुवा कबूल नहीं होती है जब तक वो सारे गुनाहों से सच्ची तौबा न कर लें! उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान में कब्र पर फातिहा पढ़ें. सिर्फ अगरबत्ती जला कर वापस ना आ जाऐं इस लिए के कब्रिस्तान में आग ले जाना सख्त मना है अगर खुशबु ले जाना मकसद है तो ईत्र ले जाएं या गुलाब जल का छिड़काव करें या मां बाप की कब्रों पर गुल पोशी करें ये सब जायज है. दुनिया से रुख्सत हो चुके लोगों के लिए मगफिरत की दुआ करें. उन्होंने कहा कि पटाखा और आतिशबाज़ी करने से बचें और अपने बच्चों को सख्ती से मना करें ईन सब कामों में पैसा बर्बाद ना कर के उसी पैसे को अपने बच्चों की शिक्षा पर लगाएं किसी गरीब की मदद करें वो आप के लिए और आप के बच्चों के भविष्य के लिए काम आएगा.

    फिजूल खर्च करने वाला है शैतान का भाई

     पटाखा और आतिशबाजी में पैसा खर्च करना फिजूल खर्ची है और अल्लाह पाक के क़ुरान में इर्शाद है कि फिजूल खर्च करने वाला शैतान का भाई है. यह गुनाह की तरफ ले जाता है. उन्होंने कहा कि घरों में इस मौके पर जो भी बनाया जाता है, उसे फातेहा देकर गरीबो मिस्कीनों को भी दें. किसी भी शीरनी पर गरीबो का भी अधिकार होता है. इससे सवाब और बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि शब ए बारात के दिन ही होली का पर्व भी है.  उन्होंने कहा कि बे वजह घर से नहीं निकले. अगर घर से निकलना जरूरी हो तो एहतियात रखें. फिरभी अगर किसी जगह आप के उपर होली के रंग पड़ भी जाते हैं तो घर आकर खुद को साफ कर लें. बिना वजह किसी का विरोध न करें. सभी को अपना पर्व मनाने की आज़ादी है. अगर किसी को रंगों से परहेज़ है तो उन्हें खुद की हिफाज़त खुद करना चाहिए. उन्होंने कहा कि शब ए बारात में रात को इबादत करें और फजिर में कब्रिस्तानों पर जाकर गुज़रे हुए लोगों की मगफिरत की दुआ करें और 15वीं तारीख़ का रोजा रख के उस एक रोजा रखने से पिछले एक साल का सगीरा गुनाह माफ़ होता है और आने वाले रमजान में रोजा रखने की परेस्टिक भी हो जाती है. उन्होंने कहा कि कोशिश करें कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग मस्जिदों में पहुंचे और अपनी दुनिया और आखिरत को सवांरे.

    रिपोर्ट: जफ़र हुसैन, पलामू   


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