सबसे अधिक राजस्व देने के बावजूद कोयलांचल की फिर से बजट में हुई उपेक्षा, जनप्रतिनिधि भी खामोश


धनबाद(DHANBAD)- झारखंड के 1, 01,101 करोड़ के बजट में भी धनबाद ठगा महसूस कर रहा है. कोयलांचल में अगर सिटी बसें फिर से शुरू हो जाती हैं. शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज को अत्याधुनिक बना लिया जाता है तो यह तो अच्छी बात है. लेकिन क्या कोयलांचल धनबाद को इस बजट से इतना ही मिलना चाहिए. यह एक बहुत बड़ा सवाल है. यह सवाल गठबंधन सरकार के साथ-साथ यहां के जनप्रतिनिधियों के लिए भी है. कोयलांचल को ज्यादा सुविधा नहीं मिलने का जिस तरह की कड़ी प्रतिक्रिया जनप्रतिनिधियों (चाहे वह किसी भी दल से जुड़े हो) होनी चाहिए थी ,देखने को नहीं मिल रही है.
संथाल से दिल्लगी और कोयलांचल से रुसवाई, ये कैसी राजनीति
धनबाद के आम लोग चिल्ला- चिल्ला कर कह रहे हैं कि कोयलांचल के साथ एक बार फिर हक़ मारी हुई है. हालांकि हकमारी पहले भी होती रही है लेकिन इस बार लोगों को उम्मीद थी कि कोयलांचल पर सरकार विशेष कृपा बरसाएगी लेकिन ऐसा हुआ कुछ भी नहीं. धनबाद के बैंकमोड़ में फ्लाईओवर के लिए चिल्लाहट बहुत दिनों से चल रही है. लेकिन इस बजट में उसके लिए कोई राशि प्रावधान नहीं किया गया है और तो और धनबाद से रांची को जोड़ने वाला लाइफ लाइन के रूप में विख्यात नया बाजार फ्लाईओवर को मरम्मत की सख्त जरूरत है. इसके लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है.
फ्लाईओवर पर राजनीति तो हुई लेकिन प्रावधान नहीं हुआ
अभी हाल ही में फ्लाईओवर की जांच हुई थी. जांच के बाद तकनीकी टीम ने स्पष्ट कर दिया था कि इस फ्लाईओवर की जिंदगी 20 साल से अधिक नहीं है और अगर आगे चलाना है तो इसकी मरम्मत बहुत ही जरूरी है. लेकिन इस पर भी कुछ नहीं किया गया है. संथाल के क्षेत्र में देवघर के बाद साहिबगंज के लिए दूसरा एयरपोर्ट का प्रावधान किया गया है. लेकिन धनबाद को इस सुविधा से अछूता रखा गया है. सवाल यहां बड़ा यह है कि देवघर में जब एयरपोर्ट अब शुरू होने के किनारे पर खड़ा है तो ऐसे में साहिबगंज को एयरपोर्ट देकर सरकार क्या बताना चाहती है. इसका एक कारण राजनीतिक भी दिख रहा है.धनबाद के छह विधानसभा सीट में से वर्तमान में झामुमों व कांग्रेस को एक-एक सीट मिला है. उसमें भी एक सीट सहानुभूति की कृपा से हासिल हुई है. दरअसल यह क्षेत्र भाजपा वर्चस्व वाला है.
धनबाद एयरपोर्ट के सारी अहर्ता को पूरा करता है फिर भी अन्याय
धनबाद एयरपोर्ट के सारी अहर्ता को पूरा करता है फिर भी धनबाद के साथ अन्याय किया जा रहा है. यहां से हवाई यात्रा करने वाले अभी या तो रांची जाते हैं अथवा दुर्गापुर कोलकाता से फ़्लाइट पकड़ते है. उसमें जब धनबाद में IIT -ISM,सिम्फ़र,डीवीसी ,बीसीसीएल जैसे विश्वस्तरीय संस्थान है. इतना तो तय है कि झारखंड में रांची के बाद धनबाद ही वो शहर है ,जहां हवाई यात्रा करने वालों की संख्या अन्य शहरों से अधिक है. फिर भी सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. रही बात शिक्षा के क्षेत्र में काम का तो धनबाद में बीबीएमकेयू को छोड़कर कोई भी शैक्षणिक संस्थान झारखंड राज्य बनने के बाद नहीं खोले गए है.
कोई अतिरिक्त न तो मेडिकल और ना ही इंजीनियरिंग कॉलेज खुले
इसके अलावे कोई भी अतिरिक्त न तो मेडिकल और ना ही इंजीनियरिंग कॉलेज कोयलांचल में खोले गए है. इसे हक मारी नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे. स्थानीय जनप्रतिनिधि दावा करते हैं कि कोयलांचल को आईआईटी मिला है ,उन्हें कौन बताए कि आईएसएम ब्रिटिश काल मे वर्ष 1929 का कॉलेज है, जिसे सिर्फ आईआईटी का टैग दे दिया गया है. नया आईआईटी नहीं खुला है, अभी निरसा जामताड़ा को जोड़ने वाली दामोदर नदी पर बना बरबेंदिया का आधा अधूरा पुल का मामला अभी गर्म है. उम्मीद थी कि इस बजट में उस पुल के लिए भी सरकार कुछ करेगी लेकिन हुआ कुछ भी नहीं.
कोयला आधारित उद्योगों के प्रति भी उदासीनता
कोयलांचल में कोयला आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं लेकिन उद्योगों के प्रति सरकार की उदासीनता लोगों को खल रही है. ख़ातियान व भाषा विवाद को लेकर जातिगत राजनीति करने वाले नेताओं को वोटबैंक की चिंता ज्यादा है. अपनी रोटी सेंकने के लिए सत्ताधारी दल के विधायक तक धरना- प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कोयलांचल का विकास कैसे हो, यहां के लोगों की जिंदगी कैसे सुधरे ,शैक्षणिक वातावरण कैसे बहाल हो ,इस पर किसी का भी ध्यान नहीं है.
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड जीटा अध्यक्ष सह झामुमो व्यवसायिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अमितेश सहाय ने कहां कि यह पहली बार है ,जब सबके हित का ख्याल रखते हुए झारखंड में पहली बार एक लाख करोड़ पार का बजट पेश किया गया है. उद्योग का विकास हो, कृषि का विकास हो या अन्य कोई भी क्षेत्र ,सबका इसमें ख्याल रखा गया है. एयरपोर्ट के लिए जमीन चिन्हित कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया है ,अब यह काम केंद्र को करना है, इसलिए अगर झारखंड के सांसद सक्रिय हो जाएं तो धनबाद को एयरपोर्ट भी मिल जाएगा.
धनबाद में एयरपोर्ट का नहीं मिलना, सांसद और विधायक जिम्मेवार
AIMIM झारखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हुबान मल्लिक ने कहा कि धनबाद में एयरपोर्ट का नहीं मिलना , फ्लाईओवर नहीं बनना ,इसके लिए धनबाद के सांसद और विधायक जिम्मेवार है. आज खनिज रॉयल्टी मद के DMFT फंड में 800 करोड़ से अधिक की राशि पड़ी हुई है ,अगर थोड़ा सा प्रयास किया जाए तो डीएमएफटी फंड से नगर निगम भी फ्लाईओवर बनवा सकता है. उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य दोनों का बजट उठा कर देख लीजिए ,धनबाद को झुनझुना मिला है.
रिपोर्ट :अभिषेक कुमार सिंह ,ब्यूरो हेड ,धनबाद
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