दुमका के प्रथम सांसद के पुत्र की इलाज के दौरान मौत ! फूलोझानो मेडिकल कॉलेज की कारगुजारियां आईं सामने

    दुमका के प्रथम सांसद के पुत्र की इलाज के दौरान  मौत !  फूलोझानो मेडिकल कॉलेज की कारगुजारियां आईं सामने

    दुमका (DUMKA) :  दुमका के प्रथम सांसद बटेश्वर हेंब्रम के छोटे पुत्र 44 वर्षीय ब्रह्मदेव हेंब्रम की मौत मंगलवार को इलाज के दौरान फूलोझानो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हो गई. मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं अस्पताल प्रबंधन ने आरोप को खारिज किया और कहा कि मरीज अस्पताल में गंभीर हालत में लाए गए थे.

    आधार कार्ड के कारण देर !

    28 फरवरी की शाम तबीयत बिगड़ने पर परिजन ब्रह्मदेव को फूलोझानो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी. लेकिन अस्पताल परिसर में स्थापित सीटी स्कैन सेंटर में मरीज के आधार कार्ड की मूल प्रति की मांग की गई जो उस वक्त परिजनों के पास उपलब्ध नहीं थी. लैब टेक्नीशियन आधार कार्ड के फोटो कॉपी को मानने के लिए तैयार नहीं हुए. बाद में लैब टेक्नीशियन प्रवीण कुमार द्वारा सीटी स्कैन के नाम पर 1300 रुपये लेने का आरोप मृतक की बहन सुशीला ने लगाया है. यही नहीं, सुशीला ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का भी आरोप लगाया है. उसका कहना है कि अगर डॉक्टर रेफर कर दिए होते तो आज उनका भाई जीवित होता.  सुशील ने कहा कि पहले उसने यह सोचकर अपना परिचय नहीं दिया कि डॉक्टर इलाज कर देंगे. जब तबियत ज्यादा खराब होने लगी तो उसने अपना परिचय प्रथम सांसद की बेटी के रूप में दिया. इसके बाद पूरा महकमा दौड़ने लगा. जब तक डॉक्टर कुछ कर पाते तब तक भाई की मौत हो गयी.

    अस्पताल अधीक्षक का कहना है

    परिजन के इस आरोप पर फूलोझानो मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ रविंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है. मरीज की हालत नाजुक थी. उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर पैसा लेने का जो आरोप लगा है, उसकी जांच की जाएगी और जांच में अगर लैब तकनीशियन दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी.

    खेती करते थे ब्रह्मदेव हेंब्रम

    हम आपको बता दें कि दुमका के प्रथम सांसद बनने का गौरव सरैयाहाट प्रखंड के बटेश्वर हेम्ब्रम को मिला. उनके छोटे पुत्र ब्रह्मदेव हेम्ब्रम खादी ग्रामोद्योग में गार्ड के रूप में नौकरी करते थे. कोरोना संकट के दौर में उनकी नौकरी छूट गयी. उसके बाद वह गांव में रहकर खेती करने लगे थे.


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