बराकर नाव हादसा ; पुल बन गया होता नहीं जाती 17 लोगों की जान, 5 सीएम के कार्यकाल में भी पूरी नहीं हुई जांच

    बराकर नाव हादसा ; पुल बन गया होता नहीं जाती 17 लोगों की जान, 5 सीएम के कार्यकाल में भी पूरी नहीं हुई जांच

    धनबाद(DHANBAD) - जामताड़ा-धनबाद सीमा पर बराकर नदी में बरबेंदिया पुल के पास 24 फरवरी की शाम नौका हादसे में लापता लोगों में 14 शव बरामद कर लिया गया है. , रविवार को सात लोगों के शव मिले थे. शनिवार को एक महिला का शव बरामद किया गया था. पिछले पांच दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने अब तक 14  शवों की खोज की है.आधा दर्ज़न  लोग अब भी लापता है. नदी के अंदर डूबे  लोगों का शव फूलकर एक-एक कर पानी के ऊपर उपला रहा है. हादसे के बाद से लापता लोगों को खोजने का अभियान जारी है, इस अभियान में एनडीआरएफ के साथ स्थानीय लोग भी मदद कर रहे है.  

     हादसे के समय नाव पर 25 लोग थे सवार

     जब हादसा हुआ, उस समय नौका पर 25 लोग सवार थे, हालांकि गांव वालों ने नदी में डूब रहे पांच लोगों को निकाल लिया था. रविवार सुबह से ही एनडीआरएफ की टीम, पंचेत से पहुंची गोताखोरों की टीम और दर्जनभर से ज्यादा स्थानीय नावें तलाशी अभियान में लगी थीं, उधर निरसा घाट पर भी प्रशासन की ओर से तलाश की जा रही थी.सोमवार को भी अभियान जारी था.  

    तैनात रही पुलिस और आइआरबी बटालियन

    शनिवार को उपद्रव के बाद  पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी पूरी टीम के साथ रेस्क्यू आपरेशन की निगरानी करते रहे. बता दें कि 25 लोग निरसा घाट पर नाव में सवार होकर जामताड़ा के ग्रामीण क्षेत्र में आ रहे थे. इनमें से ज्यादातर लोग वैसे थे जो धनबाद से मजदूरी और अन्य जरूरी काम कर लौट रहे थे.  अधिकतर लोग जामताड़ा के वीरगांव, श्यामपुर, मेंझिया और पजनियां समेत अन्य गांवों के थे.  प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार देर शाम तेज हवा चलने लगी, बिजली कड़कने के साथ बारिश होने लगी, इससे नौका का संतुलन बिगड़ा और वह डूब गई.

    ग्रामीणों में आक्रोश 

    ग्रामीणों में इस घटना से काफी आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार पुल के निर्माण के प्रति लापरवाह बनी हुई है. मुआवजा देने में सरकार जितना भरोसा करती है ,उतना अगर पुल निर्माण में की होती  तो इतने लोगों की जाने आज नहीं जाती.  ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पिछली बार तो डबल इंजन की सरकार थी लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ. नेता चाहे किसी भी पार्टी या दल का हो, उसे सिर्फ वोट से मतलब होता है. वोट लेने के बाद वह सब कुछ भूल जाता है. यह भी बताया कि 2008 में 36 करोड़ की लागत से पुल के 56 खंभों का निर्माण हुआ था लेकिन 2009 के मई में पहली बरसात में ही बरबेंदिया के निर्माणाधीन पुल के  5 खंभे ढह गए.और आधा दर्जन खंभे इधर उधर मुड़(टिल्ट) गये...वर्ष 2008 में इसके निर्माण में लगे स्पेशल डिवीजन के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता भोला राम अभी भी गिरिडीह में पदस्थापित वहीं पुल निर्माण करने वाली जीआर डोकानिया कंपनी को 2009 में ही  ब्लैकलिस्टेड कर उसकी शेष 14 करोड़ की राशि को फ़ॉरफिट करते हुए ज़ब्त कर लिया गया . बताया जाता है कि उक्त कंपनी ने काम पूरा किये बिना ही 36 करोड़ में से 22 करोड़ का भुगतान लिया था. मजेदार बात ये है कि तत्कालीन सीएम मधु कोड़ा के समय हुई इस घटना को पिछले 14 साल से सरकार जांच ही करवा रही है कि इस मामले का असल दोषी कौन है.  झारखंड में 5 मुख्यमंत्री का कार्यकाल में भी अभी तक जांच पूरी नहीं हुई ...सच पूछिये तो जांच के नाम पर खानापूर्ति हुई , लीपापोती हुई और अधिकारी मजे में नौकरी कर रहें है. ग्रामीणों को इस बात पर भी रोष है कि स्थानीय जामताड़ा के विधायक डॉ इरफान अंसारी ने भी कुछ नहीं किया.  
    हालांकि डॉ इरफान अंसारी ने कहा है कि उनकी सीएम से बात हुई  है. जल्द ही पुल बनेगा. अगर नहीं बना तो आगे वह भी इसी बराकर नदी में कूदकर जान दे देंगे.
     

     कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल पंहुचा ,सरकार को जाएगी रिपोर्ट

    आज सोमवार को धनबाद जिला कांग्रेस के स्वास्थ  प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार राय के नेतृत्व में एक टीम  गई थी.  टीम में वरीय  कांग्रेस नेता सह ज़िप सदस्य अशोक कुमार सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र वर्मा ,उपाध्यक्ष जोगेंद्र सिंह जोगी, बबलू दास, दीपक मिश्रा ,श्यामल भंडारी, भास्कर झा , महेंद्र साहनी आदि शामिल थे. धनबाद छोर  से इनलोगों ने घटना का मुआयना किया और कहा कि एक रिपोर्ट बनाकर धनबाद के प्रभारी मंत्री सह आपदा मंत्री बन्ना गुप्ता सहित सरकार को दी जाएगी, मुआयना  के बाद कांग्रेस नेता सह ज़िप सदस्य अशोक कुमार सिंह ने कहा कि  2008 में पुल निर्माण में जो अभियंता ,अधिकारी ,ठेकेदार थे उन सभी पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए. उनकी लापरवाही से पुल नही बना और आज नाव हादसें में 20 लोगों की जान गई। उनकी मांग है कि जब तक पुल का निर्माण नहीं हो जाता  सरकार अपने स्तर से नाव परिचालन की व्यवस्था करे जिससे लोगो की जाने नहीं जाय  झारखंड बनने के बाद 14 साल तक भाजपा की सरकार रही  लेकिन किसी को कुछ नसीब नहीं हुआ.  यह घटना भी भाजपा की अकर्मण्यता का, विफलता का, एक बहुत बड़ा उदाहरण है. पिछली डबल इंजन की सरकार में भी लोगों को राहत नहीं मिला। वही कांग्रेस जिला कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र वर्मा ने कहा कि हम लोग देखने आए थे और इसकी एक संयुक्त रिपोर्ट अपने अधिकारियों को भेजेंगे और मांग  करेंगे कि सरकार इसकी गंभीरता को समझें और पुल का निर्माण जल्द से जल्द कराये.


    रिपोर्ट :अभिषेक कुमार सिंह ,ब्यूरो हेड ,धनबाद


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