हो जाएं सतर्क, झारखण्ड में डीजल को लेकर आने वाली है आफत..!


धनबाद (DHANBAD) : झारखंड में “बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. अभी यूपी-उतराखंड समेत पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए केंद्र के दबाव में तेल कम्पनियों ने डीजल के खुदरा मूल्यों में तो बढ़ोतरी नहीं की. लेकिन बड़े उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में पिछले एक माह में प्रति लीटर 9 रुपए की बढ़ोतरी कर दी. नतीजा यह हुआ कि झारखंड के बड़े उपभोक्ता, जो उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से डीज़ल ला रहे थे, वे अब स्थानीय पेट्रोल पम्पों से डीज़ल ख़रीद रहे हैं. इसका सीधा फ़ायदा झारखंड सरकार को हो रहा है. पांच राज्यों के चुनाव ने अभी सरकार को बैकफुट पर खड़ा किए हुए है. डीजल और पेट्रोल का मूल्य अभी नियंत्रित है जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगातार बढ़ रही है. अभी रूस और यूक्रेन से हो रहे युद्ध से हालात लगातार बिगड़ रहें हैं. कच्चे तेल की कीमत भी बढ़ रही है. भारत में अभी छोटे डीजल -पेट्रोल के उपभोक्ताओं को तो अभी राहत मिली हुई है, लेकिन बड़े-बड़े ,जो उपभोक्ता हैं ,उन पर मूल्य का दबाव बढ़ रहा है.
बड़े उपभोक्ताओं पर प्रति लीटर 9 रुपए की चाबुक
जानकारी के अनुसार बड़े उपभोक्ता जो सीधे कंपनियों से डीजल खरीदते हैं, उनके लिए कीमतों में प्रति लीटर 9 रुपए का उछाल आया है. उन्हें महंगा डीजल खरीदना पड़ रहा है. ऐसे में उन लोगों ने भी एक तरकीब निकाली है. सीधे कंपनियों से खरीदारी करने के बजाय स्थानीय पेट्रोल पंप से डीजल खरीद कर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं. क्योंकि स्थानीय पेट्रोल पंप से मिलने वाले डीजल में अभी कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है.
7 मार्च तक ही रह सकती है राहत
लगता है कि 7 मार्च तक बढ़ोतरी होगी भी नहीं, क्योंकि उसी दिन पांच राज्यों में अंतिम मतदान होने वाला है. सरकार ने अभी कंपनियों को दाम बढ़ाने -घटाने से शायद रोक रखा है. वहीं 7 मार्च के बाद कभी भी कंपनियों को छूट मिल जाएगी कि वह अपने घटती बढ़ती लागत औऱ बाज़ार भाव के अनुसार डीजल-पेट्रोल की कीमत बढ़ाएं या घटाएं, फिर तो जैसे पहले का अनुभव रहा है. रोज कुछ ना कुछ कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहेगा. ऐसे में डीजल -पेट्रोल की कीमत कितनी ऊपर जाएगी या कम होगी. यह कहना अभी बहुत मुश्किल है. लेकिन इतना तो तय है कि बड़े उपभोक्ता जो अभी पेट्रोल पंप से डीजल खरीद कर राहत की चादर ओढ़े हुए हैं. वह चादर 7 मार्च के बाद हट जाएगी. फिर उन्हें भी महंगी दर पर ही डीजल खरीदना होगा. इस मामले में हमारे धनबाद ब्यूरो हेड अभिषेक कुमार सिंह ने कोल उत्पादन में लगी बीसीसीएल की आउटसोर्सिंग कंपनी रामअवतार के प्रबंध निदेशक अमरेश सिंह और धनबाद के कोलफिल्ड्स पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव संजीव राणा से ख़ास बातचीत की और इसका दूरगामी परिणाम जाना.
झारखंड में तो वैट घटने के आसार नहीं
झारखंड में तो वैट घटने के आसार नहीं दिख रहे हैं, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कल ही कहा कि झारखंड सरकार के पास वैट ही एक फार्मूला है, जिसे सरकार की आमदनी हो रही है. ऐसे में इससे छेड़छाड़ करना सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाना है. उन्होंने यह जरूर कहा कि अगर यहां की जनता को बहुत अधिक परेशानी होगी तो सरकार कुछ सोच सकती है. मतलब साफ है कि जिस कीमत पर अभी पेट्रोल- डीजल झारखंड में बिक रहा है, उसे कम होने की उम्मीद करना बेमतलब होगी. मंत्री जी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की आमदनी के सारे स्रोतों को केंद्र सरकार जीएसटी के अधीन कर अपने पास रख लिया है, ऐसे में राज्य सरकारों को परेशानी हो रही है. मतलब यह है कि चुनाव के बाद तेल कंपनियों को दर घटाने- बढ़ाने की छूट मिल जाएगी और झारखंड में वैट घटेगा नहीं, फिर जनता माथा पीटती रहे, इससे जनता के भाग्य विधाताओं को कोई लेना -देना नहीं है.
रिपोर्ट : अभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो हेड, धनबाद
4+