व्यवस्था पर तमाचा : भूखे सोए ,चंदा बटोरा फिर ठीक कराया चापाकल 

    व्यवस्था पर तमाचा : भूखे सोए ,चंदा बटोरा फिर ठीक कराया चापाकल 

    धनबाद (DHANBAD) : इसको क्या कहेंगे, व्यवस्था का दोष या काम में लापरवाही या फिर लालफीताशाही. गरीबों की कोई सुनता क्यों नहीं, यह सवाल तीखा है, लेकिन सच है. जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह सोचने -समझने की बात है कि क्या सिर्फ चुनाव के समय ही जनता याद आती है.  चुनाव के बाद जनता की परेशानी देखने -सुनने की जनप्रतिनिधि कोशिश क्यों नहीं करते. सामाजिक कार्यकर्ता अनिल पांडे ने सवाल किया है कि क्या व्यवस्था सिर्फ उन्हीं की सुनती है जो रसूखदार हैं, क्या अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों का कोई महत्व नहीं है.  

    आठ महीने में भी नहीं सुनी सरकारी, व्यवस्था

    अनिल पांडे की माने तो भूदा  गुलगुलिया बस्ती में लगे दो चापाकल पिछले साल जून महीने से ही खराब थे. कई महीनों तक पार्षद के पास दौड़ने के बाद सितंबर महीने में  बस्ती के लोगों ने धनबाद के नगर निगम को पत्र लिखा.  कई बार निगम कार्यालय का चक्कर भी लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. थक -हार कर आपस में उन लोगों ने चंदा इकट्ठा किया, फिर चापाकल को दुरुस्त कराने का काम शुरू किया.  आज 8 फरवरी को चापाकल पानी देना शुरू कर दिया है.  8 माह की कोशिश जब काम नहीं आई तो चंदे से इकट्ठा किए गए लगभग ₹3000 से चापाकल को दुरुस्त कराया गया है.  सवाल उठता है कि जिन के लिए 3000 कुछ नहीं है, वह कुछ नहीं सोचेंगे, लेकिन किसी प्रकार जीवन यापन करने वाले गुलगुलियो के लिए तीन हजार की रकम बड़ी राशि है. इस राशि के लिए उन्हें कई दिनों तक भूखे पेट भी सोना पड़ा  होगा. 


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news