बॉर्डर पर थे तैनात, अब थामी शिक्षा की मसाल, एक रिटायर सैनिक ने यूं उतारा गांव का कर्ज

    बॉर्डर पर थे तैनात, अब थामी शिक्षा की मसाल, एक रिटायर सैनिक ने यूं उतारा गांव का कर्ज

    गुमला (GUMLA)- गुमला के ग्रामीण इलाकों में अब भी शिक्षा की व्यवस्था बदतर है. इसी विपरीत माहौल से निकलकर गुमला जिला के भरनो ब्लॉक क्षेत्र के परवल के जिरहुल गांव निवासी नारायण साहू ने किसी प्रकार आर्मी की नौकरी पाई. देश की सेवा कर अपने क्षेत्र का नाम रौशन किया. रिटायरमेंट के बाद वापस आने पर उन्होंने अपनी जैसी परेशानी से गांव के बच्चों को बचाने की ठानी. उसी सोच से गांव में एक भव्य  स्कूल का निर्माण किया. नारायण इंटरनेशनल सैनिक स्कूल के नाम से स्कूल खोल कर कहा कि अब लग रहा है कि गांव का जो कुछ कर्ज उनपर था, उसे वे उतार रहे हैं. बकौल नारायाण साहू, स्कूल बच्चों में देश भक्ति का जज्बा भी पैदा करेगा.

    हर तरह की सुविधा होगी स्कूल में

    स्कूल में वह सारी सुविधा दी गयी है जो आज के महंगे स्कूलों में होता है. बच्चों को शिक्षा के साथ ही खेलकूद स्विमिंग के साथ ही अन्य गतिविधि में शामिल होने का अवसर मिलेगा. निश्चित रूप से इलाके के लिए यह स्कूल मील का पत्थर साबित होगा. कल तक यह इलाका पीएलएफआई नक्सलियों का गढ़ के रूप में जाना जाता था. लेकिन अब शिक्षा के हब के रूप में जाना जाएगा. आर्मी की सेवा करने के बाद वापस आकर जिस तरह से नारायण साहू से शिक्षा की दीप गांव में जलाने की सोची है, वह काफी सराहनीय है.

    रिपोर्ट : सुशील कुमार सिंह, गुमला


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