सांसद सुनील महतो हत्याकांड के स्टाइल में हुआ गुरुचरण नायक पर हमला, गनीमत रही भाजपा नेता बच निकले

    सांसद सुनील महतो हत्याकांड के स्टाइल में हुआ  गुरुचरण नायक पर हमला, गनीमत रही भाजपा नेता बच निकले

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : पश्चिम सिंहभूम के गोईलकेरा थाना क्षेत्र के झीलरूआ गांव में नक्सलियों ने तांडव मचाते हुए ठीक सांसद सुनील महतो हत्याकांड स्टाइल में एक और घटना को अंजाम देने की कोशिश की. नक्सलियों ने मनोहरपुर के पूर्व भाजपा विधायक गुरुचरण नायक पर गोलीबारी करते हुए हमला बोला, जिसमें वे तो बाल-बाल बच गए लेकिन उन्हें बचाने में दो अंगरक्षक सह झारखंड पुलिस के जवान शंकर नायक और ठाकुर हेंब्रम शहीद हो गए. इस घटना में तीसरा अंगरक्षक राम कुमार टुडू घायल हो गया है.

    गोईलकेरा थाना से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर इस घटना को अंजाम दिया गया. पूर्व विधायक फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे. ग्रामीणों के बीच हथियारबंद 20-25 नक्सली भी शाम 5.30 तक पहुंच चुके थे. मौके देखते ही अचानक नक्सलियों ने गोली चलानी शुरू कर दी. नक्सलियों ने पहले दोनों अंगरक्षकों को गोली मारी और फिर गला रेत दिया. इसके बाद नक्सलियों ने तीसरे गार्ड राम कुमार टुडू पर भी हमला किया. लेकिन वह किसी तरह बच गया. उसके सिर के पिछले हिस्से और आंख के नीचे गहरी चोट लगी है. उधर हमला होते ही पूर्व विधायक गुरूचरण नायक बचते-बचाते मंच से झाड़ियों की तरफ भागे. इसी बीच नायक का ड्राईवर उनकी गाड़ी को मुख्य सड़क पर लाया और उन्हें वहां आने को कहा. इधर नक्सलियों ने तीनों गार्डों के एके 47 को अपने कब्ज़े में ले लिया और दो गार्डों की हत्या करके तीसरे गार्ड राम कुमार टुडू को छोड़ दिया. गुरुचरण नायक और तीसरे गार्ड टुडू के वाहन पर पहुंचते ही ड्राईवर सबको लेकर थाने पहुंचा.

    इसी स्टाइल में हुई थी सांसद सुनील महतो की हत्या

    होली के दिन 4 मार्च 2007 को ठीक इसी तरह तत्कालीन जमशेदपुर सांसद सुनील महतो पर जमशेदपुर से 40-50 किलोमीटर दूर घाटशिला के बागुड़िया में एक फुटबॉल मैच के समापन समारोह के दौरान ही नक्सलियों ने गोलीबारी कर हमला किया था. इस घटना में सांसद सुनील महतो, उनके दो अंगरक्षकों और तत्कालीन झामुमो प्रखंड सचिव प्रभाकर महतो की मौत हो गई थी. बागुड़िया में आयोजित फुटबॉल मैच में सांसद सुनील महतो इसी तरह मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे थे. सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण वहां मौजूद थे. 15-20 की संख्या में पहुंचे नक्सली राहुल के दस्ते ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर घटना को अंजाम दिया था. आज़ाद भारत में ये अपने आप में पहली घटना थी जहां अपने ही संसदीय क्षेत्र में मौजूदा सांसद की नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी. 

     अब तक नहीं खुला सांसद हत्याकांड का राज़

    सांसद सुनील महतो हत्याकांड का आज तक खुलासा नहीं हो पाया है. घटना का मुख्य सूत्रधार असीम मंडल उर्फ राकेश अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. मुख्य आरोपी रंजीत पाल उर्फ राहुल ने अपनी पत्नी के साथ 2017 में बंगाल पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. लेकिन सीबीआई ने रिमांड पर लेने में कोई खास सक्रियता नहीं दिखाई. राहुल समेत अन्य पर आरोप पत्र दाखिल कर इतिश्री कर ली गई. सुनील महतो की पत्नी सुमन महतो के लगातार आवाज़ उठाने पर तत्कालीन रघुवर सरकार ने 2018 में एनआईए जांच की अनुशंसा की, लेकिन केस में कोई प्रगति नहीं हुई.

    गुरुचरण नायक पर हमला नक्सली धमक का संकेत

    पिछली रघुवर सरकार ने राज्य में नक्सलियों को नेस्तनाबूद करने का अहम कार्य किया था. इसी का परिणाम था कि पूर्वी सिंहभूम का घोड़ाबांदा इलाका पूरी तरह तब उग्रवाद मुक्त हो गया, जब कान्हू मुंडा के दस्ते ने सरेंडर कर दिया. वहीं राज्य के विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर नक्सलियों ने राज्य की सरेंडर पौलिसी के तहत सरेंडर भी किया. ये अभियान मिला-जुलाकर हेमंत सरकार के आने तक जारी रहा. हालांकि बीच-बीच में नक्सली वारदातें होती रहीं, लेकिन पिछले दिनों नक्सलियों के बड़े नेता प्रशांत बोस की सरायकेला से गिरफ्तारी से पुलिस के हौसले बुलंद थे. पिछले कुछ समय से लगातार हो रही छिट पुट नक्सली वारदातों के बीच अब पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर हमले ने हेमंत सरकार की नक्सल नीति पर सवाल खड़े किए हैं. सवाल ये भी उठ रहा है कि खुफिया तंत्रों ने अलर्ट क्यों नहीं किया?, क्या उनको सूचनाएं नहीं मिलतीं?

    गुरुचरण नायक पर पहले भी हुए हैं नक्सली हमले

    विधायक रहते 2012 में गुरुचरण नायक पर आनंदपुर थाना क्षेत्र में दो बार नक्सली हमले हो चुके हैं. सरकारी कार्यक्रम में पहुंचे विधायक पर नक्सलियों ने एक घंटे के अंतराल पर दो बार हमला किया था. इसके जवाब में पुलिस की तरफ से भी गोलीबारी की गई थी. तब भी वे बाल-बाल बच गए थे. एक बार फिर नक्सलियों ने जिस दुस्साहस का परिचय देते हुए गुरुचरण नायक पर हमला किया है, वह इस बात का परिचायक है कि उनके हौसले कितने बुलंद हैं.

    रिपोर्ट : अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड (जमशेदपुर)


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