कोरोना इफेक्ट : घाटों की भीड़ से परहेज, अब छठ के लिए घर ही पहली पसंद

    कोरोना इफेक्ट : घाटों की भीड़ से परहेज, अब छठ के लिए घर ही पहली पसंद

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) - कोरोना काल की दोनों लहरों में हुए जान माल के नुकसान को देखते हुए सरकार के साथ आम लोग भी जागरूक हो गए हैं. अब लोग भी कोरोना गाइडलाइन के तहत ही पर्व त्योहार मना रहे हैं. ताकि वे सभी सुरक्षित रहें. इसका उदाहरण जमशेदपुर में देखने को मिल रहा है. जहां इस बार आस्था के महापर्व छठ को लेकर लोग नदी घाटों पर जाने की बजाए कृत्रिम तालाबों पर जोर दे रहे हैं. जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह इसको लेकर बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं. वैसे तो राजकुमार सिंह भीषण गर्मियों में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या होने पर टैंकरों द्वारा नि:शुल्क पानी घर घर पहुंचाने की व्यवस्था करते हैं, लेकिन छठ में भी वे कृत्रिम तालाबों पर नि :शुल्क जल की सेवा दे रहे हैं. ताकि नदी घाटों पर न जाकर लोग भीड़ से बचें और घर या घर के पास पूजा कर सकें.

    बजट का अभाव

    जमशेदपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में यूं तो कई तालाब हैं, लेकिन उनकी साफ सफाई को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक उदासीनता रहती है. उसके पीछे बजट का अभाव बताया जाता है. जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह बागबेड़ा और आस-पास समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 30 छोटे-बड़े छोटे तालाबों की साफ-सफाई का जिम्मा हर साल उठाते हैं. ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि 5 साल में एक बार चुनाव के समय ही नजर आते हैं. लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इन क्षेत्रों पर पड़े तो छठ व्रतधारियों को और भी ज्यादा सहूलियत हो जाएगी.

    रिपोर्ट : अन्नी अमृता, जमशेदपुर


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