कौन है 6 करोड़ का इनामी देवजी, जिसने 16 साथियों के साथ डाल दिया हथियार


TNPDESK: नक्सल संगठन के सबसे बड़ा नेता देवजी आखिर कार हथियार डाल कर मुख्यधारा में लौट गए. देवजी तेलंगाना पुलिस के सामने आत्म समर्पण किया है. इनके साथ 16 साथी शामिल है. जिसमें एक करोड़ के इनामी संग्राम भी शामिल है. इस आत्म समर्पण से संगठन को एक बड़ी चोट पहुंची है. देव जी अब तक नक्सलवाद के मशाल को जला कर चल रहे थे. बसवा राजू के मारे जाने के बाद संगठन में सबसे बड़ी जिम्मेवारी भी इन्हे मिली थी. पार्टी में महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया था.
देवजी के साथ संग्राम ने भी किया सरेंडर
अब आखिर कार देवजी उर्फ तिप्पिरी तिरुपति ने तेलंगाना में सुरक्षा बल के जवानों के पास सरेंडर कर दिया. देवजी के साथ 16 नक्सली शामिल है. जिसमें संग्राम भी शामिल है. संग्राम पर भी एक करोड़ का इनाम है और संगठन में पोलित ब्योरों सदस्य है.सभी ने एक साथ आत्म समर्पण किया है. अगर देव जी और संग्राम की बात कर ले तो इनपर कई राज्यों में बड़े वारदात को अंजाम देने में शामिल रहने का आरोप लगा है. यही वजह है कि देव जी पर अलग अलग राज्यों में कुल 6 करोड़ का इनाम था.
कौन है देवजी
देवजी माओवादी संगठन में सबसे सीनियर कमांडर था. करीब तीन दशक से अधिक समय से हथियार लेकर जंगल में घूम रहा था और अपनी समांतर व्यवस्था चला रहा था. पहले माओवादियों की मिलिट्री विंग का प्रमुख भी रह चुका है. साथ ही हाल में बसवा राजू के ENCOUNTER के बाद खाली पड़े महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया. जिससे संगठन को मजबूत किया जा सके और माओवादी को एक नेतृत्व संकट से निकाला जा सके.
7 माह पहले महासचिव का मिला पद
लेकिन यह जिम्मेवारी मिलने के 7 माह बाद ही देवजी ने हथियार डाल दिया.माना जा रहा है कि देवजी ने पहले अपने साथियों के साथ बैठक की आपस में निर्णय लिया और उसके बाद तेलंगाना में सरेंडर करने का फैसला लिया. यह मूल रूप तेलंगाना के करीमनगर का रहने वाला है.उनका जन्म एक दलित परिवार में हुआ था. शुरुआत की पढ़ाई के बाद करीब 30 साल की उम्र में नक्सल संगठन में शामिल हो गए थे.
तीन दशक तक संगठन में रहे सक्रिय
करीब साढ़े तीन दशक तक माओवादी दस्ते में रहे. इस बीच कई बड़े हमले में शामिल रहने की खबर सामने आती रही. छत्तीसगढ़-तेलंगाना और अन्य राज्य में देवजी सक्रिय दिखे थे. खास कर रानी बोदली की घटना जिसमें 50 से अधिक जवानों की शहादत हुई. इसके साथ ही दंतेवाडा में 80 जवानों की शहादत के पीछे भी इनका ही नाम आता है. इसके अलावा कई बड़ी वारदात में शामिल रहे है.
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