“दुल्हन भी गई, पैसे भी गए” नासिक में शादी के नाम पर ठगी, गरीब युवकों को बनाया निशाना

    “दुल्हन भी गई, पैसे भी गए” नासिक में शादी के नाम पर ठगी, गरीब युवकों को बनाया निशाना

    TNP DESK: महाराष्ट्र में शादी के नाम पर मासूम लड़किया जो आर्थिक रूप से कमजोर हो उनको निशाना बनाकर एक संगठित गिरोह लंबे समय से फर्जी शादी का रैकेट चला रहा था. नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन ने ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा किया है, जो खुद को मैट्रिमोनियल ब्यूरो बताकर लोगों को शादी का झांसा देता था और फिर लाखों रुपये की ठगी कर फरार हो जाता था.

    पुलिस जांच में पता चला कि यह गिरोह खासतौर पर किसानों और कम आय वाले परिवारों को निशाना बनाता था.आरोपी पहले परिवारों का भरोसा जीतते, फिर शादी कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे. शादी होने के कुछ दिनों बाद ही दुल्हन किसी बहाने से ससुराल छोड़ देती और दोबारा वापस नहीं लौटती थी.

    जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने नासिक में “वधू-वर सूचक केंद्र” के नाम से एक फर्जी मैट्रिमोनियल नेटवर्क बना रखा था. इसी नेटवर्क के जरिए लड़कियों और बिचौलियों के संपर्क कराए जाते थे. शादी तय होने के बाद दूल्हे पक्ष से लाखों रुपये लिए जाते थे.

    ऐसा ही एक मामला धुले जिले के शिंदखेड़ा तालुका के वैपुर गांव निवासी 42 वर्षीय बलवंत साहेबराव पाटील के साथ सामने आया. शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें एक लड़की दिखाई और शादी कराने के एवज में ₹2.70 लाख लिए. इसके अलावा शादी की सामग्री के नाम पर ₹4,000 अलग से वसूले गए.

    30 मार्च 2026 को धूमधाम से विवाह कराया गया और परिवार को लगा कि बेटे का घर बस गया है. लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही दुल्हन का व्यवहार बदलने लगा. वह आए दिन विवाद करने लगी और आत्महत्या की धमकी देने लगी. बाद में वह ससुराल छोड़कर सीधे दलाल के घर जाकर रहने लगी और वापस लौटने से इनकार कर दिया. इसके बाद परिवार को एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित ठगी का शिकार हो चुके हैं.

    एफआईआर के मुताबिक, दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच आरोपियों ने फर्जी शादी के जरिए शिकायतकर्ता समेत कई लोगों से करीब ₹5.28 लाख की ठगी की। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है.

    जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और गुप्त सूचना के आधार पर तीन महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया.सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 19 मई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में कई दलाल और महिलाएं शामिल थीं, जो अलग-अलग जिलों में नकली दुल्हन बनकर लोगों को ठगने का काम करती थीं.

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र के कई इलाकों में योग्य लड़कियों की कमी, सामाजिक दबाव और आर्थिक असमानता के कारण गरीब और ग्रामीण युवक ऐसे गिरोहों के आसान शिकार बन रहे हैं. कई परिवार बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत भी नहीं करते, जिसकी वजह से ऐसे फर्जी विवाह रैकेट लगातार सक्रिय बने हुए हैं.

     



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