नक्सलियों के सीजफायर प्रपोजल पर अमित शाह की दो टूक, कहा-हथियार डालें नहीं तो मारे जाएंगे

    नक्सलियों के सीजफायर प्रपोजल पर अमित शाह की दो टूक, कहा-हथियार डालें नहीं तो मारे जाएंगे

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक ऐलान से लाल आतंक दहशत में आ गया है. उन्होंने कहा कि नक्सली हथियार डाल दें नहीं तो बक्शे नहीं जाएंगे. दरअसल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर वे हथियार डालकर आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है. सुरक्षा बल उन पर एक भी गोली नहीं चलाएँगे, लेकिन युद्धविराम नहीं होगा. अगर नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, तो एक लाभकारी पुनर्वास नीति के साथ उनका स्वागत किया जाएगा. गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च, 2026 तक देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा.

    यह पहली बार है जब किसी शीर्ष केंद्रीय नेता ने एक पखवाड़े पहले नक्सलियों द्वारा दिए गए युद्धविराम प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी है. 'नक्सल मुक्त भारत' पर एक संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में एक पत्र लिखा गया था जिसमें कहा गया था कि हम, नक्सली, आत्मसमर्पण करना चाहते हैं.

    नक्सलियों ने पत्र लिख कर की युद्ध विराम की मांग

    बताते चलें कि इससे पहले नक्सलियों ने गृह मंत्री के नाम पत्र लिखकर युद्धविराम की मांग की गई थी. तेलंगाना कैडर के नक्सली प्रवक्ता 'जगन' द्वारा जारी किए गए पर्चे में तेलुगु भाषा में लिखा है कि नक्सलियों ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और कविता द्वारा शांति वार्ता की पहल को "गर्व की बात" बताया है. साथ ही कहा गया है कि समाज के कई बुद्धिजीवी और प्रसिद्ध हस्तियां भी इस पहल का समर्थन कर रही हैं.

    कुछ समय से तेलुगु राज्यों में हमारी पार्टी और सरकार के बीच शांति वार्ता की मांग शुरू हो गई है. इसके तहत शांति वार्ता समिति का गठन किया गया है. देश भर में कुछ उपद्रवी समूह, व्यक्ति, प्रमुख लोग और दल यही मांग कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि वे बातचीत के मुद्दे पर आंतरिक रूप से चर्चा करेंगे और निर्णय लेंगे. सीपीआई कगार ऑपरेशन को रद्द करने और शांति वार्ता आयोजित करने के लिए पहले से ही राज्य भर में कार्यक्रम आयोजित कर रही है. अन्य सभी वामपंथी दलों ने उन कार्यक्रमों में भाग लिया. बीआरएस पार्टी ने भी शांति वार्ता आयोजित करने के लिए अपने रजत पदक के साथ विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया.

    कुछ दिनों पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी शांति वार्ता की मांग की थी. पूर्व मुख्यमंत्री एचआरएस नेता चंद्रशेखर राव ने भी इसी मांग का जिक्र किया था. बीआरएस नेता कविता ने भी यही मांग की है. यह एक स्वागत योग्य घटनाक्रम है.

    राज्य में कई अन्य बुद्धिजीवी और मशहूर हस्तियां इसी मुद्दे पर अभियान चला रही हैं. सभी वामपंथी दल इसी मांग को लेकर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं. बातचीत की प्रक्रिया को राज्य और देश में लोकतांत्रिक माहौल लाने के प्रयास के रूप में समझा जाना चाहिए. इन प्रयासों को सकारात्मकता देने के लिए हम युद्ध विराम की घोषणा कर रहे हैं.


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