‘ऊंची दुकान फीके पकवान’, ऐसा हुआ AI Summit का हाल, दूसरे के रोबोट को बताया दिया अपना माल


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आपने ‘ऊंची दुकान फीके पकवान’ वाली कहावत तो जरूर ही सुनी होगी. अब यह कहावत इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो में बीते दिनों की घटना पर एकदम सटीक बैठ रहा है. दरअसल इन दिनों इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी को कथित तौर पर चीनी रोबोट और कोरियन ड्रोन को अपना प्रोजेक्ट बताने के आरोप में कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया है. साथ ही बताया गया कि आयोजकों ने पहले यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली काटी और बाद में स्टॉल को बंद कर उसके आसपास बेरीकेडिंग कर दी. यह कार्रवाई एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद हुई, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है.
ये Robotic Dog चीन में पैदा हुआ,
— Indian Youth Congress (@IYC) February 17, 2026
मंत्री अश्विनी वैष्णव से लेकर Galgotias University और दूरदर्शन ने इसे भारतीय आविष्कार बताने में कोई कसर नही छोड़ी। इसे Modi ji का Vision बताया गया।
अभी अंतरराष्ट्रीय मंच और भद्द पिटवाना बाकी है? pic.twitter.com/CB6nWsuBVY
असल में वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह एक रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ को गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की उपलब्धि बताती नजर आ रही थीं. उन्होंने यह भी कहा था कि यूनिवर्सिटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है. वीडियो सामने आते ही कई टेक एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोट असल में चीन की कंपनी यूनिट्री का ‘Go2’ मॉडल है, जो बाजार में लगभग 2 से 3 लाख रुपये की कीमत पर उपलब्ध है. इसके अलावा, एक अन्य वीडियो में जिस ड्रोन को यूनिवर्सिटी की ओर से कैंपस में ‘शुरुआत से विकसित’ बताया जा रहा था, उसे भी यूजर्स ने कोरियन कंपनी का रेडीमेड मॉडल बताया.
मामले ने तूल तब पकड़ा जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दावे को लेकर ‘कम्युनिटी नोट’ जोड़ा गया. इस नोट में कहा गया कि यूनिवर्सिटी का यह कहना कि उसने रोबोट को अपना नहीं बताया, भ्रामक है, क्योंकि वीडियो में स्पष्ट रूप से उसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया था. कम्युनिटी नोट फीचर के जरिए आम यूजर्स किसी पोस्ट में संदर्भ जोड़कर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करते हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया.
First China, now Korea. Galgotias is on a world tour of 'borrowed' innovation. 🌍.
— Indian Youth Congress (@IYC) February 18, 2026
They claimed to have built India’s first Drone Soccer from scratch on campus, but it’s actually just a Striker V3 ARF from Korea. 🇰🇷
Atmanirbhar’ or just ‘Atmanir-buy’ Modi ji? pic.twitter.com/8iRUeU0aAJ
विवाद बढ़ने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक रूप से माफी मांगी. यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में कहा कि उनके स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि को उत्पाद के बारे में पूरी तकनीकी जानकारी नहीं थी और कैमरे के सामने आने के उत्साह में कुछ बातें गलत तरीके से पेश हो गईं. यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि रोबोटिक डॉग उन्होंने विकसित नहीं किया है, बल्कि इसे छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक से परिचित कराने के उद्देश्य से खरीदा गया था. उनका कहना था कि यह मशीन छात्रों के लिए एक ‘चलता-फिरता क्लासरूम’ है, जिस पर वे प्रयोग कर सकते हैं और नई तकनीक को समझ सकते हैं.
प्रोफेसर नेहा सिंह ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बातों को स्पष्ट रूप से नहीं रखा जा सका और इसके लिए वह जिम्मेदारी लेती हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि पूरा घटनाक्रम बहुत तेजी और उत्साह में हुआ, जिससे संचार में भ्रम की स्थिति पैदा हुई.
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया. कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस घटना से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा है. पार्टी नेताओं का आरोप था कि AI समिट जैसे महत्वपूर्ण मंच पर विदेशी उत्पादों को भारतीय उपलब्धि बताकर पेश करना शर्मनाक है. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी टिप्पणी करते हुए इसे एक ‘डिसऑर्गनाइज्ड पीआर स्पेक्टेकल’ करार दिया. उनके अनुसार, भारत के टैलेंट और डेटा का सही उपयोग करने के बजाय इवेंट को बड़े प्रचार के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन प्रबंधन की कमी के कारण वह विवाद का कारण बन गया.
पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा संस्थानों की पारदर्शिता, तकनीकी दावों की सत्यता और बड़े आयोजनों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि AI और उभरती तकनीकों के दौर में संस्थानों को अपने दावों को लेकर बेहद सतर्क और तथ्यपरक होना चाहिए. यह मामला केवल एक यूनिवर्सिटी या एक समिट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात की याद दिलाता है कि डिजिटल युग में हर दावा तुरंत जांच के दायरे में आ सकता है.
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