TNP DESK- क्या बंगाल में भाजपा की जीत का असर पूरे देश में होगा? क्या विपक्षी दल भाजपा से डर गए हैं? क्या ममता बनर्जी बंगाल की राजनीति अकेले दम पर कुछ करने में खुद को असमर्थ पा रही हैं? क्या वह एक बार फिर नीतीश कुमार की तरह विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर भाजपा को घेरने की कोशिश करेंगीं? क्या कांग्रेस को इसमें उनका साथ मिलेगा? यह सब ऐसे सवाल हैं, जो कोलकाता से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं. यह बात तो तय है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत ने ममता बनर्जी को परेशान कर दिया है. तृणमूल कांग्रेस में भी टूट होने लगी है लोग इधर-उधर आने-जाने का सिलसिला चल निकला है.
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने विपक्षी गठबंधन की बैठक की कोशिश में
ऐसे में ममता बनर्जी एक बार फिर विपक्षी गठबंधन को लेकर सक्रिय होती दिख रही हैं. सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने विपक्षी गठबंधन की एक बैठक बुलाने का आह्वान किया है. सवाल है कि सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस का क्या ममता बनर्जी को साथ मिलेगा? यह सवाल इसलिए भी बड़ा हो जाता है कि पिछली बार जब विपक्षी एकजुटता की बात चल रही थी, तो ममता बनर्जी किसी बात को लेकर नाराज हो गई. उसके बाद वह विपक्षी एकता से अलग-अलग चलने लगी. यहां तक की 2026 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के साथ ममता बनर्जी का गठबंधन नहीं हुआ. यह अलग बात है कि बंगाल के कांग्रेस नेता ममता बनर्जी से नाराज चल रहे हैं. वह यह कहकर बच रहे हैं कि इसका निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही ले सकता है.
ममता बनर्जी के झुकने की कई वजहें हैं -
यह बात सच है कि विपक्षी नेताओं के सामने ममता बनर्जी के झुकने के कई वजह हैं. 2021 में 215 सीट जीतने वाली ममता बनर्जी 2026 में केवल 80 सीट पर सिमट गई. ममता बनर्जी के पुराने सहयोगी शुभेंदु अधिकारी ने इस बार बड़ा गेम कर दिया। नतीजा हुआ कि तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीट पर सिमट गई. दरअसल, बंगाल में कमजोर पड़ने के बाद ममता बनर्जी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ अपने संबंध को सुधार कर अपनी प्रसंग प्रासंगिकता को बनाए रखना चाहती है. राजनीति पंडितों का कहना है कि विपक्षी दलों में मतभेद भले भी हो, लेकिन भाजपा का डर उन्हें एक साथ रहने को मजबूर करता है. ममता बनर्जी इसी रणनीति के तहत आगे बढ़ रही हैं. वह इस बात को पूरी तरह से समझ रही हैं कि इस काम के लिए कांग्रेस का साथ जरूरी है. सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस ममता बनर्जी को स्वीकार करेगी? यह बात सच है कि बंगाल की राजनीति पूरी तरह से बदलती जा रही है. 15 साल तक शासन करने वाली ममता बनर्जी खुद को अलग-थलग पा रही हैं. विरोध भी हो रहा है ,पार्टी के भीतर भी आवाज उठ रही है. ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी पार्टी नेताओं तक के निशाने पर है. ऐसे में ममता बनर्जी अपनी रणनीति को बहुत सोच समझकर आगे बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रही हैं.

