टीएनपी डेस्क(TNP DESK): असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राजनीतिक तस्वीर और दिलचस्प होती जा रही है. जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोबारा सत्ता में वापसी की ओर बढ़ती दिख रही है, वहीं झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM ने ‘एकला चलो रे’ की रणनीति अपनाई और सीमित सीटों पर चुनाव लड़ते हुए भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है.
ताजा रुझानों के मुताबिक, JMM असम की कुछ अहम सीटों पर दूसरे स्थान पर चल रही है, जो पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. मजबात सीट पर JMM उम्मीदवार प्रीति रेखा बारला ने सभी को चौंकाते हुए शानदार प्रदर्शन किया है. वह 19,778 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर मजबूती से बनी हुई हैं, हालांकि वह अपने प्रतिद्वंद्वी से करीब 2,610 वोट पीछे चल रही हैं.इसी तरह भेरगांव सीट पर प्रभात दास पानिका भी मजबूत स्थिति में हैं. उन्होंने अब तक 10,473 वोट प्राप्त किए हैं और दूसरे स्थान पर कायम हैं. यहां भी मुकाबला कड़ा है और वे अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से लगभग 4,379 वोट पीछे हैं.
इसके अलावा कई अन्य सीटों पर भी JMM तीसरे स्थान पर बनी हुई है, जो पार्टी के विस्तार की संभावनाओं को दर्शाता है. चबुआ सीट से भूपेन सिंह मुरारी 3,341 वोट के साथ तीसरे स्थान पर हैं. वहीं खुमटाई से अमित नाग (2,628 वोट), डिगबोई से भरत नायक (2,269 वोट) और रंगापाड़ा से मैथ्यू टोपनो (945 वोट) भी तीसरे स्थान पर बने हुए हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में JMM के इस प्रदर्शन के पीछे चाय बागान से जुड़े श्रमिक समुदाय का बड़ा योगदान है. राज्य में करीब 70 लाख चाय जनजाति के लोग रहते हैं, जिन पर JMM ने खास फोकस किया। हेमंत सोरेन द्वारा इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग ने इन क्षेत्रों में असर डाला है, जिसका फायदा पार्टी को मिलता दिख रहा है.
हालांकि JMM अभी जीत से दूर नजर आ रही है, लेकिन सीमित संसाधनों और पहली बार इस स्तर पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी ने जो उपस्थिति दर्ज कराई है, वह उसके राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. आने वाले समय में यह प्रदर्शन JMM की राजनीतिक रणनीति को नई दिशा दे सकता है.

