क्या झारखंड में अब मंईयांओं को 2,500 के साथ मिलेंगे 10 हजार रुपये? सूबे के मंत्री ने बिहार के तर्ज पर कर दी ये कैसी मांग ?

    क्या झारखंड में अब मंईयांओं को 2,500 के साथ मिलेंगे 10 हजार रुपये? सूबे के मंत्री ने बिहार के तर्ज पर कर दी ये कैसी मांग ?

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): राज्य में महिलाओं को हर माह 2500 रुपये की राशि, मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के रूप में दी जाती है. यह राशि हर महीने महिलाओं के आधार स लिंक बैंक खाते में भेजी जाती और अबतक लभुकों के खाते में 17वीं किस्त भेजी जा चुकी है. ऐसे में जल्दी ही 18वीं किस्त भी मैयाओं के खाते में भेज दी जाएगी. 

    पर इन दिनों राज्य में मंईयां योजना की 2500 रुपये की राशि से ज्यादा चर्चा हो रही है 10000 रुपये की. हालही में बिहार में महिलाओं को रोजगार के लिए दीये गए 10 हजार रुपये की राशि के तर्ज पर झारखंड में भी यह मांग उठी है. और यह मांग और किसी ने नहीं बल्कि हेमंत कैबिनेट के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से की है.

    दरअसल सूबे के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से राज्य के समग्र विकास के लिए कई अहम मांगें रखी हैं. नई दिल्ली में आयोजित बजट-पूर्व विचार-विमर्श कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बिहार की तर्ज पर झारखंड की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ी मंईयां को कुटीर उद्योग शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की कोल कंपनियों पर झारखंड का बकाया 1,36,042 करोड़ रुपये का भुगतान शीघ्र कराने की मांग भी की. 

    वित्त मंत्री ने बताया कि फिलहाल राज्य सरकार की ओर से 51 लाख मंईयां को हर महीने 2500 रुपये की सहायता दी जा रही है. उन्होंने कहा कि झारखंड को बने 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन राज्य को सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन और उग्रवाद जैसी समस्याएं विरासत में मिली हैं. ऐसे में केंद्र सरकार से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है. 

    उन्होंने जीएसटी दरों के युक्तिकरण के कारण राज्य को हर साल लगभग 4,000 करोड़ रुपये के नुकसान का हवाला देते हुए इसकी भरपाई की मांग की. साथ ही एफआरबीएम एक्ट के तहत ऋण सीमा को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए अगले पांच वर्षों तक विशेष केंद्रीय सहायता देने का आग्रह किया. 

    पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नेतरहाट, तेनुघाट और चांडिल को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने, विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं, रेल परियोजनाओं, सिंचाई, सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी केंद्र से सहयोग मांगा गया. वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सभी मांगों का उद्देश्य गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है.


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