WEF 2026: ग्रीन स्टील से बदलेगा औद्योगिक भारत का भविष्य, झारखंड–टाटा स्टील के बीच 11,100 करोड़ का ऐतिहासिक समझौता

    WEF 2026: ग्रीन स्टील से बदलेगा औद्योगिक भारत का भविष्य, झारखंड–टाटा स्टील के बीच 11,100 करोड़ का ऐतिहासिक समझौता

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 में झारखंड ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड के बीच ग्रीन स्टील तकनीक को लेकर एक ऐतिहासिक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस समझौते के तहत झारखंड में 11,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से अगली पीढ़ी के आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलेगी. इस निवेश से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे.

    झारखंड सरकार और टाटा स्टील की यह साझेदारी न्यू एज ग्रीन स्टील प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य कार्बन-न्यूट्रल और सतत औद्योगिक भविष्य की दिशा में ठोस कदम बढ़ाना है. नीदरलैंड और जर्मनी में विकसित अत्याधुनिक तकनीकों को झारखंड में लागू कर राज्य को हरित विनिर्माण के वैश्विक मानचित्र पर अग्रणी बनाने की योजना है. इस अवसर पर टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन सहित कंपनी का प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा.

    HISARNA और EASyMelt से बदलेगी आयरनमेकिंग की तस्वीर
    इस निवेश का बड़ा हिस्सा अगली पीढ़ी की आयरनमेकिंग तकनीकों HISARNA और EASyMelt पर खर्च किया जाएगा, जिन पर लगभग 7,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. HISARNA तकनीक स्वदेशी कोयले और निम्न श्रेणी के लौह अयस्क के उपयोग को संभव बनाती है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और स्टील उत्पादन अधिक किफायती होगा. साथ ही, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में करीब 80 प्रतिशत तक कमी लाने की क्षमता इस तकनीक को खास बनाती है. टाटा स्टील वर्ष 2030 तक जमशेदपुर में लगभग 1 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाला वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है.

    वहीं EASyMelt तकनीक, जो सिनगैस आधारित प्रक्रिया पर आधारित है, पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस की तुलना में कोक की खपत कम करेगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी लाने में सहायक होगी.

    औद्योगिक ढांचे को मिलेगा नया आयाम
    ग्रीन आयरनमेकिंग के अलावा, इस निवेश पैकेज में 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक कॉम्बी मिल और 2,600 करोड़ रुपये के टिनप्लेट विस्तार की योजना भी शामिल है. यह समग्र औद्योगिक निवेश झारखंड की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेगा, उच्च तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा करेगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में राज्य की स्थिति को और सुदृढ़ बनाएगा.

    पर्यावरण के साथ संतुलित विकास का मॉडल
    झारखंड सरकार का यह कदम इस बात का उदाहरण है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं. हरित तकनीकों को अपनाकर राज्य सतत विकास के उस मॉडल को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ प्रकृति के संतुलन को भी प्राथमिकता दी जाती है.

    25 साल का झारखंड, हरित भविष्य की ओर
    राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हुआ यह समझौता झारखंड के बदलते औद्योगिक सफर का प्रतीक है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड पारंपरिक खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर हरित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है. इसी क्रम में झारखंड में टाटा समूह से जुड़े खनन और विनिर्माण स्थलों पर औद्योगिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक अलग एमओयू पर भी सहमति बनी है.

    बैठक के दौरान टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन ने दावोस में मुख्यमंत्री की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा, विनिर्माण और खनन जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति कर रहा है और राज्य को ऐसे वैश्विक बिजनेस मंचों पर नियमित रूप से भाग लेना चाहिए. मुख्यमंत्री ने राज्य की आईटीआई संस्थाओं को रोजगार और बाजारोन्मुख बनाने के लिए टाटा स्टील द्वारा उन्हें गोद लेने का प्रस्ताव रखा, जिस पर कंपनी ने सहमति जताई. इस अवसर पर टाटा समूह की ओर से मुख्यमंत्री को दावोस स्थित टाटा डोम में रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया.


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