रूपेश मंडल के कंधों पर दुमका भाजपा की साख: जिलाध्यक्ष की कुर्सी सम्मान या सियासी अग्निपरीक्षा !

    रूपेश मंडल के कंधों पर दुमका भाजपा की साख: जिलाध्यक्ष की कुर्सी सम्मान या सियासी अग्निपरीक्षा !

    दुमका (DUMKA) : दुमका के अग्रसेन भवन में शुक्रवार को भले ही तालियों की गूंज रही हो, लेकिन भाजपा के नए जिलाध्यक्ष रूपेश मंडल के लिए यह कुर्सी जश्न से ज्यादा सियासी इम्तिहान बनकर आई है. चुनाव अधिकारी शैलेन्द्र सिंह द्वारा नाम की घोषणा के साथ ही दुमका भाजपा की अंदरूनी हकीकत भी नए नेतृत्व के हवाले कर दी गई है.

    रूपेश का संगठनात्मक सफर रहा है मजबूत

    आरएसएस के बाल स्वयंसेवक से लेकर विहिप, बजरंग दल और फिर दो टर्म युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष, रूपेश मंडल का संगठनात्मक सफर मजबूत रहा है. लेकिन अब सवाल संगठन नहीं, परिणाम का है. क्योंकि दुमका भाजपा लंबे समय से सत्ता और प्रभाव दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रही है. गुटबाजी, कमजोर जनाधार और विपक्ष के मजबूत सामाजिक समीकरणों ने पार्टी को बैकफुट पर रखा है. ऐसे में जिलाध्यक्ष की कुर्सी फूलों की सेज नहीं, कांटों का ताज साबित हो सकती है.

    रूपेश के मार्ग में चुनौतियां ही चुनौतियां

    रूपेश मंडल के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कार्यकर्ताओं को साथ रखना नहीं, बल्कि पार्टी को ज़मीन पर खड़ा करना है. अगर संगठन में ढील रही, तो यह नियुक्ति भी कागजी बदलाव बनकर रह जाएगी.चुनाव अधिकारी शैलेन्द्र सिंह ने मंच से कहा कि भाजपा सेवा की राजनीति करती है, सत्ता की नहीं. लेकिन दुमका की जनता अब नारों से आगे जमीनी काम और राजनीतिक धार देखना चाहती है. यह भी साफ है कि अगर दुमका की आवाज सचमुच रांची तक पहुंचानी है, तो नए जिलाध्यक्ष को सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि टकराव की राजनीति और संगठनात्मक अनुशासन दिखाना होगा. अब भाजपा के भीतर और बाहर दोनों की निगाहें रूपेश मंडल पर टिकी हैं. यह कुर्सी उन्हें मजबूत नेता बनाएगी या सियासी दबाव में झुका देगी, इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा.

     


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news