बिजनेस करना चाहती थी, 'धंधा' नहीं! रांची की इस लड़की की खूबसूरती ही बन बैठी उसकी दुश्मन... रंग रूप ने बना दिया रशियन

    बिजनेस करना चाहती थी, 'धंधा' नहीं! रांची की इस लड़की की खूबसूरती ही बन बैठी उसकी दुश्मन... रंग रूप ने बना दिया रशियन

    रांची (RANCHI): आज डिजिटल मीडिया के दौर में कब कौनसी चीज वायरल हो जाए, यह कोई नहीं जनता. पर सोशल मीडिया लोगों को जितनी लोकप्रियता दिलाती है, कभी-कभी लोगों को उतनी ही ट्रोलिंग भी झेलनी पड़ती है. पर सोशल मीडिया से होती हुई यह ट्रोलिंग राजधानी रांची की गलियों तक भी पहुँच गई और उससे पूछा जाने लगा की, क्या तुम रशियन हो...? 6000 रुपये में रात भर के लिए चलोगी...? 

    बेशक पढ़कर अजीब लगा होगा पर यह कोई कहानी नहीं बल्कि रांची में रहने वाली लड़की की आपबीती है, जिसका गोरा-चिट्टा रूप रंग और सुनहरे बाल ही उसके जीवन का काल बन गए. 

    दरअसल बिहार के सोनपुर जिले की रोजी नेहा सिंह ने रांची के लालपुर इलाके में चिकन-लिट्टी की दुकान खोली थी, लेकिन ग्राहकों और राहगीरों के भद्दे कमेंट और धमकियों के चलते मजबूर होकर उसे दुकान बंद करनी पड़ी. नेहा पेशे से मेकअप आर्टिस्ट हैं और पिछले कई सालों से इस फील्ड में काम कर रही हैं. नौकरी में वेतन न मिलने और काम की कठिनाइयों के कारण उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू करने का निर्णय लिया.

    दुकान खोलने के बाद नेहा को सबसे ज्यादा परेशानी उनके लुक और रंग-रूप को लेकर मिली. स्थानीय लोगों और राहगीरों ने सार्वजनिक रूप से उन्हें “रशियन” कहकर भद्दे कमेंट किए और कई बार असभ्य ऑफर भी दिए. पर बात यही तक नहीं रुकी और इंस्टाग्राम पर उनका एक साधारण वीडियो वायरल होने के बाद स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ गई. 

    आलम ये हो गया था की अब लोग खाने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ नेहा को देखने और ट्रोल करने के लिए उनकी दुकान पर आने लगे. कई बार उन्हें इंस्टाग्राम मैसेज के जरिए धमकियां भी मिलीं और रात में घर लौटते समय पीछा किया गया.

    हालांकि नेहा ने कभी सोशल मीडिया पर अपनी तकलीफों का दिखावा नहीं किया. उनका उद्देश्य केवल बिजनेस करना था, लेकिन लगातार उत्पीड़न और मानसिक दबाव के कारण उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ी. 

    हालांकि नेहा ने हार नहीं मानी है और वे अब फिर से व्यवसाय शुरू करने की तैयारी में हैं.  लेकिन इस बार ऐसी जगह पर जहां सुरक्षा और स्टाफ की व्यवस्था हो. साथ ही वे अन्य वैराइटी जैसे चिकन-चावल, मटन-चावल आदि पर भी काम करने की योजना बना रही हैं. उनके परिवार के सदस्य कपड़ों की दुकान खोलने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन नेहा अब पूरी तरह से अपने दम पर बिजनेस करने की कोशिश में लगी हैं. नेहा की यह कहानी उन सभी महिलाओं की हिम्मत और संघर्ष की मिसाल है, जो समाज की चुनौतियों के बावजूद अपने पैरों पर खड़ी होने की कोशिश करती हैं.


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