मनरेगा का नाम बदलने पर सियासी बवाल, 5 जनवरी को कांग्रेस करेगी लोक भवन का घेराव

    मनरेगा का नाम बदलने पर सियासी बवाल, 5 जनवरी को कांग्रेस करेगी लोक भवन का घेराव

    दुमका (DUMKA) : शनिवार को दुमका स्थित कांग्रेस भवन में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मनरेगा का नाम बदलकर भीबी ग्राम जी योजना किए जाने का कड़ा विरोध किया.

    केंद्र सरकार पर गरीब विरोधी होने का आरोप

    प्रदीप यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को गरीबों के दर्द का कोई एहसास नहीं है. यह सरकार शुरू से ही गरीब विरोधी रही है और अडानी, अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के संरक्षण के लिए काम कर रही है.

    मजदूर विरोधी योजना बताया

    उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी और जनहितकारी योजना की मूल भावना के खिलाफ भीबी ग्राम जी योजना लाई गई है. यह योजना मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को छीनने वाली है तथा ग्राम सभा और पंचायत की स्वायत्तता को कमजोर करती है.

    ग्राम स्वराज की अवधारणा पर चोट

    प्रदीप यादव ने कहा कि महात्मा गांधी की कल्पना ग्राम स्वराज और विकेंद्रीकरण की थी, जबकि नई योजना इसके ठीक विपरीत है. इससे गांवों की निर्णय लेने की शक्ति समाप्त हो जाएगी.

    राज्यों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

    उन्होंने कहा कि 60:40 की हिस्सेदारी के कारण झारखंड पर हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिसे राज्य सरकार वहन नहीं कर सकती. यही कारण है कि केंद्र सरकार ने इसे वैकल्पिक योजना बनाकर राज्यों पर थोपने का प्रयास किया है.

    काम की गारंटी खत्म होने का खतरा

    प्रदीप यादव ने कहा कि यह नई योजना मजदूरों को काम की गारंटी नहीं देती. काम का चयन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है, जिससे रोजगार के अवसर और घटेंगे.

    मनरेगा का ऐतिहासिक महत्व

    उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार ने मनरेगा को एक कानून के रूप में लागू किया था, जो केवल रोजगार योजना नहीं बल्कि गरीबों को काम का संवैधानिक अधिकार देने वाला एक्ट था.

    कठोर प्रावधान और मजदूरों का अधिकार

    मनरेगा के तहत यदि 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता था तो दंड का प्रावधान था. यह दर्शाता है कि यह कानून कितना सख्त और मजदूर हितैषी था. मजदूरों को अपने काम चुनने की भी पूरी स्वतंत्रता थी.

    100 दिनों की रोजगार गारंटी

    प्रदीप यादव ने कहा कि मनरेगा के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, जिसमें 90 प्रतिशत आर्थिक बोझ केंद्र सरकार और मात्र 10 प्रतिशत राज्यों पर था. इससे हर साल देश के 7 से 8 करोड़ मजदूरों को रोजगार मिलता था, जिनमें करीब 50 प्रतिशत महिलाएं थीं.

    कोरोना काल में मनरेगा बना सहारा

    उन्होंने कहा कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब फैक्ट्रियां और उद्योग बंद हो गए थे, तब गांव लौटे मजदूरों के लिए मनरेगा ही जीवन रेखा साबित हुआ.

    बेरोगारी बढ़ने की चेतावनी

    प्रदीप यादव ने चेतावनी दी कि भीबी ग्राम जी योजना लागू होने से आने वाले समय में मजदूरों की बेरोजगारी बढ़ेगी और देश में रोजगार संकट और गहराएगा.

    कांग्रेस ने किया आंदोलन ऐलान

    उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस फैसले का अंतिम दम तक विरोध करेगी. मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत 5 जनवरी को रांची स्थित लोक भवन के घेराव का ऐलान किया गया है.

    लोकभवन के समक्ष विरोध का बिगुल

    प्रदीप यादव ने कहा कि 5 जनवरी को मनरेगा मजदूरों, गरीबों के हितैषियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ मिलकर लोक भवन के सामने विरोध का बिगुल फूंका जाएगा.


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